इलाहाबाद। गंगा के मैदान में तापमान ने इस बार पिछले 19 साल का रिकार्ड तोड़ा और पारा 47 डिग्री तक पहुंच गया। दो दिन 47 डिग्री तापमान से लोग अभी बेहाल ही थे कि रही सही कसर उमस ने पूरी कर दी। रविवार को दमघोंटू उमस ने शहरियों को बेचैन कर दिया। तेज धूप में बादल तो आए, लेकिन राहत नहीं दिला पाए। भारी उमस और गर्मी से बेहाल लोगों को सांस लेने में जबरदस्त परेशानी महसूस हुई। वायुमंडल में उमस का असर कुछ ऐसा हुआ कि शरीर में नमक की मात्रा कम होने से कई लोग राह चलते चक्कर खाकर गिर गए, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।
भारी उमस ने सांस के रोगियोें की मुसीबतें अचानक बढ़ा दी। वायुमंडल में आर्द्रता अत्यधिक और पारा 45 के आसपास होने की वजह से आक्सीजन का स्तर अचानक गिर गया। पहले से ही अस्थमा की दवा ले रहे कई रोगियों को अपने डॉक्टरों को संपर्क करना पड़ा। जबकि कई मरीज परेशानी होने पर सीधे डॉक्टरों के पास पहुंच गए। अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष टंडन के मुताबिक उनके पास तमाम ऐसे मरीज आए जिन्होंने सांस लेने की दिक्कत बताई। ऐसे मरीजाें की जांच करने के साथ ही उन्हें दवाइयां दी गई, जबकि कुछ गंभीर मरीजों को भर्ती भी किया गया।
गर्मी और भारी उमस का असर यह रहा कि एसआरएन, बेली, काल्विन और डफरिन जैसे सरकारी अस्पतालों में भर्ती कई मरीज और तीमारदार वार्डों से निकलकर बाहर आ गए। मरीजों-तीमारदारों ने अस्पताल परिसर में पेड़ों के नीचे जाकर बैठे लेकिन सुकून नहीं मिला। अस्पतालों में कई घंटे की बिजली कटौती के बाद बिजली का बार-बार आना-जाना मरीजों-तीमारदारों के लिए खासा मुसीबत भरा रहा।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. एसके राय के मुताबिक गर्मी और उमस के इस मौसम में यदि शरीर को स्वस्थ बनाए रखना है तो तरबूज, खरबूजा जैसे फलों के सेवन के साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त सत्तू का सेवन करें। इससे जहां लू और हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है वहीं ग्लूकोज या फिर ओआरएस पीकर शरीर की क्षमता को बरकरार रखा जा सकता है। बकौल डॉ. राय गर्मी और उमस से शरीर में सोडियम की मात्रा बेहद कम हो जाती है, जिससे चक्कर और बेचैनी की संभावना बढ़ जाती है। बेली अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. ओपी त्रिपाठी के मुताबिक इस मौसम में खानपान में एहतियात बरतकर तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है।
भीषण गर्मी और उमस से शहरियों को बचाने के लिए विश्व आयुर्वेद परिषद की आकस्मिक बैठक हुई जिसमें निर्णय लिया गया कि लोगों को बीमारियाें के प्रति जागरूक करने के साथ ही उनके बचाव की भी जानकारी दी जाय। बैठक में डॉ. प्रेम शंकर पांडेय, डॉ. रघुवंशी, डॉ. शंकर मिश्र, डॉ. जे. नाथ, डॉ. राकेश तिवारी, डॉ. एससी दूबे, डॉ. एमडी दूबे आदि थे।