इलाहाबाद। भगवती आराधना के प्रमुख पीठों में सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ भी है। मान्यता है कि यह पुराण वर्णित नवम दुर्गा सिद्धिदात्री का स्थल है। तांत्रिक ग्रंथ गणेश शाबरी के अनुसार माता सती की महामुद्रा का प्रमुख अंश नीलगिरि पर्वत से कर्षित होकर प्रयाग के इसी स्थल पर गिरा था सो यहां की गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है। कहते हैं नवरात्र की महानवमी को देवी सिद्धेश्वरी के दर्शन से ही नवरात्र व्रत को पूर्णता मिलती है।
वैसे तो यहां प्रत्येक दिन श्रद्धालु जुटते हैं, पर शुक्रवार को दर्शन-पूजन केलिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है। ब्रह्मलीन देवरहा बाबा के मुताबिक देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन के पूर्व माता सिद्धेश्वरी की ही वंदना की थी। दशकों पूर्व कुंभ मेले में आए देवरहा बाबा ने दर्शन के बाद इस स्थान की महत्ता बताई थी। उन्हीं के निर्देश पर पीठाधीश्वर आचार्य कुश मुनि उदासीन की ओर से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।