फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधायकों के भरोसे बसपा

Tue, 08 Apr 2014 05:30 AM IST
Allahabad
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद। पार्टी के पास न तो कोई ‘शॉटगन’ है, न फिल्म और टीवी स्टार्स की फौज लेकिन बसपा मंडल की हर सीट पर मुख्य लड़ाई में है। भाजपा, सपा और कांग्रेस केस्टार प्रचारक गली, मुहल्ले में घूम रहे हैं लेकिन बसपा अपने स्थानीय विधायकों और 2007 में चुनाव जीत चुके नेताओं के भरोसे ही लड़ रही है। वर्तमान और पूर्व विधायकों को जिम्मा दिया गया है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें जितने वोट मिले थे, उसे ही लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों को दिलवाएं, सीट बसपा की होगी। पार्टी की मुखिया मायावती अकेले ही चुनाव की कमान थामे हैं।
विज्ञापन

इलाहाबाद संसदीय सीट से जुड़े पांच विधानसभा क्षेत्रों में एक कोरांव परिसीमन के बाद बनी है। कोरांव के साथ करछना सीट पर बसपा का कब्जा है। शहर दक्षिणी और मेजा सीट पर हार जीत का अंतर काफी कम था। बसपा दोनों जगह दूसरे नंबर पर थी और अंतर 400 वोट के आसपास था। सभी विधायकों, पूर्व विधायकों को निर्देश है कि उन्हें जितने वोट मिले थे, उतने इस बार चुनाव में प्रत्याशी को जरूर मिलने चाहिए।
पार्टी के बड़े नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती का साफ संदेश है कि वोट प्रत्याशी नहीं पार्टी को पड़ना चाहिए। वोट कम पड़े तो वह प्रत्याशी की छवि या अन्य बहाने नहीं सुनेंगी। फूलपुर संसदीय क्षेत्र की केवल एक विधानसभा शहर पश्चिमी में बसपा है। शहर उत्तरी में कांग्रेस तो बाकी तीनों पर सपा का कब्जा है। इलाहाबाद पश्चिमी क्षेत्र में पूजा पाल और बाकी सीटों पर विधानसभा उम्मीदवार रहे नेता कपिलमुनि करवरिया की जीत के लिए रणनीति बना रहे हैं। पार्टी मुखिया के निर्देशों के तहत विधायक और पूर्व विधायक अपने क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की टीम के साथ वोटरों को जोड़ने का अभियान चला रहे हैं।
विज्ञापन

सभी विधायकों के संपर्क में रहने वाले पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है कि बसपा के परंपरागत वोटर्स को खिसकने न देना और नए को जोड़ना, इसी रणनीति पर काम चल रहा है। ब्राह्मण वर्ग और मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने के लिए कस्बों के मानिंद लोगों का साथ लिया गया है। स्टार प्रचारकों की तुलना में बसपा की यह नीति फिलहाल ज्यादा कारगर दिख रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें