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यांत्रिक नहीं संवेदनशील हों कलाएं

Mon, 16 Dec 2013 05:42 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद(ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय डेलीगेसी की निराला कला वीथिका रविवार को कला के विविध नमूनों से समृद्ध हुई। प्रख्यात चित्रकार एवं कलाविद् प्रोफेसर रामचंद्र शुक्ल ने राज्य ललित कला अकादमी की पांच दिनी क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसमें उन्होंने कहा, प्रदर्शनी में शामिल चित्र समकालीन प्रवृत्तियों का प्रतिबिंब हैं। तकनीक की बहुलता ने प्रयोगवादी कलाकारों को चुनौती दी है। लेकिन जरूरी है कि कलाएं यांत्रिक नहीं बल्कि संवेदनशील हों।
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प्रदर्शनी में सत्रह जिलों के 166 कलाकारों की तकरीबन चार सौ से ज्यादा कलाकृतियों में से पहले चरण में 84 कलाकारों की 93 कलाकृतियां चुनी गईं। इसमें मूर्तिकला, ग्राफिक्स, फोटोग्राफी, ऑयल पेंटिंग, वॉश पेंटिंग, सेरेमिक पॉट्री, टेराकोटा, टेक्सटाइल, जलरंग तथा मिश्रित माध्यम की उच्चस्तरीय कलाकृतियां शामिल हैं। संयोजक डॉ.अजय जैतली के मुताबिक प्रदर्शनी 19 दिसंबर तक रोजाना सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक जनसामान्य के लिए खुली रहेगी।
प्रदर्शनी केदौरान ब्लैक ऑन हैंडमेड पर तीन दिनी आर्टिस्ट कैंप भी होगा जिसमें कुंवर अमरेंदु, धीरज यादव, जावेदा रजा, रंजीता मौर्या, ज्ञानेंद्र, शोभित यादव, अभिषेक पाल, अंशुदीप धूसिया सहित पंद्रह कलाकार शामिल होंगे।
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कलाविद् प्रोफेसर रामचंद्र शुक्ल की ओर से क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी 2013 के पुरस्कारों की घोषणा की गई। इसके तहत इलाहाबाद के दो युवा कलाकारों कुंवर अमरेंदु को उनकी कृति अनटाइटिल्ड (ग्राफिक) और धीरज यादव को उनकी कृति अनटाइटिल्ड 30 (चित्र) जबकि लखनऊ के मूर्तिकार संतो कुमार चौबे को उनकी कृति ‘टोटल एक्ट’ को पुरस्कार के लिए चुना गया। इसके अतिरिक्त ज्यूरी ने इलाहाबाद के अंबरीश मिश्र की कृति अनटाइटिल्ड एवं इलाहाबाद के मूर्तिकार शनि केशरी के मूर्तिशिल्प ‘लक्ष्य’ को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना। प्रदर्शनी के समापन पर 19 दिसंबर को दिन में तीन बजे निराला सभागार में आयोजित समारोह में विजेताओं को दस हजार रुपये, स्मृति चिह्न तथा प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
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