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मानवाधिकार की रक्षा के लिए नैतिक शिक्षा जरूरी: न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह

Fri, 13 Dec 2013 05:41 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह ने कहा है कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए व्यक्ति में नैतिकता का होना नितांत आवश्यक है। इसलिए बच्चों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिवक्ताओं से अह्वान किया कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ व्यवसाय में होने के कारण उनकी जिम्मेदारी है कि वह समाज में नैतिकता को बढ़ावा दें तथा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करें। जस्टिस रवींद्र सिंह वॉयस ऑफ लॉ एंड जस्टिस द्वारा आयोजित संगोष्ठी ‘मानवाधिकार और न्यायपालिका की भूमिका’ में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि विकसित देशों में मानवाधिकार हनन अधिक है। इसे समाप्त करने के लिए सुशासन, जनचेतना और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त परिवारों के टूटने पर भी चिंता जाहिर की। बाल मजदूरी को बच्चों के मानवाधिकार का हनन बताते हुए न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह ने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि बच्चे जिस मजबूरी की वजह से काम करते हैं वह समस्या भी दूर हो। संगोष्ठी में मानवाधिकार के लिए बेहतरीन कार्य करने हेतु अधिवक्ता सुभाषा राठी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन पूर्व शासकीय अधिवक्ता देश रतन चौधरी ने किया। उन्होंने सुभाष राठी और अन्य महिला अधिवक्ताओं द्वारा मानवाधिकार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल सिंह ने की। संचालन डा. डीके तिवारी ने और विषय प्रवर्तन अनूप बरनवाल ने किया। संगोष्ठी में अशोक मेहता, एमए कदीर, वीके श्रीवास्तव आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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