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उसूल से दें जकात तो गरीबी का खात्मा संभव

Sun, 20 Oct 2013 05:38 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। तंजीम इस्लाहे मुआशरा की ओर से तीन दिनी जलसा-ए-पैगामे इस्लाह शनिवार से शुरू हुआ। इस मौके पर देश भर से जुटे उलेमा ने इस्लाम की खूबियां बताईं और साबित किया कि इस्लाम की रोशनी में दुनिया की तमाम तरह की दिक्कतों का खात्मा मुमकिन है। दर्से कुरानेपाक पर तकरीर में कारी गयास ने कुरान के बताए रास्ते पर चलने की सलाह दी।
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मौलाना सैयद मुहम्मद कादरी ने कहा, इस्लाम की सोच पर अमल करें तो पूरी दुनिया से गरीबी और भीख मांगने की प्रथा का खात्मा मुमकिन है। दौलतमंद लोग यदि इस्लाम के बताए उसूलों के मुताबिक जकात दें तो गरीबी और भीख मांगने की प्रथा को दूर किया जा सकता है। इसे दूर करने के लिए सरकार की ओर से भी योजनाएं चलाई जानी चाहिए।
तंजीम के सदर मौलाना मुजाहिद हुसैन रजवी ने कहा, इस्लाम की नजर में एक शौहर जब अपनी बीबी को तलाक दे देता है तो इद्दत के बाद वह उसके लिए अजनबी हो जाती है। जैसे किसी अजनबी पर किसी अजनबी के खाने-खर्चे केजिम्मेदारी नहीं दी जा सकती है,उसी तरह इद्दत के बाद शौहर पर खर्च की जिम्मेदारी डालना इंसानी कानून के खिलाफ है। शौकत अली रोड स्थित अकरब गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत सैयद शाहिद हुसैन, संचालन दानिश इकबाल और संयोजक डॉ.मोहम्मद शुएब खान ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। रविवार को सुबह साढ़े दस बजे से एक बजे तक महिलाओं की समस्याओं पर आधारित कार्यक्रम होगा।
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