इलाहाबाद। जनवादी लेखक संघ की ओर से रविवार को हालैंड हाल छात्रावास में आयोजित रचनागोष्ठी के तहत कवि हरीशचंद्र पांडे के नवीनतम कहानी संग्रह ‘दस चक्र राजा’ पर चर्चा की गई। परिचर्चा में शामिल वरिष्ठ कथा लेखिका प्रोफेसर अनिता गोपेश ने कहा, हरीशचंद्र पांडे की कविताएं भी कहानियां हैं जबकि उनकी कहानियों में कविता के तत्व पूरी शिद्दत के साथ शामिल हैं। बतौर अध्यक्ष आरपी राय ने कहा, कोई रचना यदि अपने समय की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से रिश्ता नहीं बनाती तो वह बेमानी है। इस दृष्टि से संग्रह की कहानियां साबित करती हैं कि रचनाकार सरल, सहज और सजग है। प्रलेस केअध्यक्ष प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने कहा, एक कवि जब कथा रचता है तो उसका शिल्प और कंटेंट अदभुत होता है। ज्यादातर छोटी कविताओं के रचनाकार हरीशचंद्र पांडे की कहानियां भी लंबी नहीं हैं लेकिन अपने पीछे बहुत सा अर्थ समेटे रहती हैं। वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल रंजन भौमिक ने संग्रह की ‘वेटिंग रूम’ शीर्षक कहानी को डाक्यूमेंटरी की संज्ञा देते हुए कहानियों की चित्रात्मकता की ओर संकेत किया। कहानीकार रणविजय सिंह ‘सत्यकेतु’ ने उनकी कहानियों को जीवन तरंग की व्याख्या बताया। कवि संतोष चतुर्वेदी ने कहा, संग्रह की अधिकतर कहानियां जीवन को प्रत्यारोहित करने वाली स्त्रियों से जुड़ी हैं। कवि अंशुल त्रिपाठी ने कहा, पहली ही कहानी साबित करती है कि जब हमारे मूलस्रोत चुप हो जाते हैं तो हम सन्निपात में चले जाते हैं।
कवि रतीनाथ योगेश्वर ने कहानियों में काव्यात्मक भाषा प्रवाह को रेखांकित किया, वहीं कवि श्रीरंग ने कहानी के प्रतीकों की चर्चा की। इससे पहले रचनाकार हरीशचंद्र पांडे ने संग्रह की तीन कहानियों वेटिंग रूम, कुंता तथा दस चक्र राजा का पाठ किया। परिचर्चा में रंगकर्मी प्रवीण शेखर, ध्रुवहर्ष, प्रसून कुमार सिंह, हितेश कुमार, धर्मेंद्र, संजय, विकास स्वरूप, रवि मिश्र, सुनीत मिश्र आदि ने भी मौजूदगी दर्ज कराई। संचालन विवेक निराला और धन्यवाद ज्ञापन सुधीर सिंह ने किया।