इलाहाबाद। मानसून का मनमाना मिजाज दिल के लिए भारी पड़ रहा है। पिछले डेढ़ महीने यानी एक जुलाई से 17 अगस्त के बीच हॉर्ट अटैक से 77 लोगों की जान जा चुकी है और 155 लोग फिलहाल अस्पतालों में भर्ती हैं। पिछले दस दिनों में ही शहर के प्रमुख अस्पतालों में भर्ती 21 लोगों की मौत हो चुकी है। बारिश के दिनों में दिल के रोगियों का यह हाल डॉक्टरों को भी हैरान कर रहा है। जुलाई के पहले पखवारे में मरीजों की भीड़ जुटने और कई की मौत से हैरान स्टेट फोरम ऑफ कार्डियोलॉजिस्ट ने अस्पतालों से आंकड़े जुटाने शुरू किए। लगातार बढ़ती बीमारों की संख्या से अचरज में पड़े चिकित्सकों ने 15 सितंबर तक के आंकड़े लेकर उसे नेशनल जर्नल के लिए भेजने का निर्णय लिया है ताकि इस पर देश भर के विशेषज्ञों से मशवरा हो सके। भारी नमी वाला मौसम इस कदर खतरनाक हो गया कि 155 मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया है। स्वरूपरानी, बेली, काल्विन और प्राइवेट अस्पतालों में मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं जो बेहद एहतियात से रहते हैं लेकिन लगातार रंग बदलता मानसून, अत्यधिक तनाव और काम के बोझ ने दिल पर दबाव बना दिया। अन्य दिनों की तुलना में पिछले डेढ़ महीने में लगभग तीन गुना दिल के रोगी बढ़े हैं। अस्पतालों के आंकड़े बताते हैं कि पहली जुलाई से 17 अगस्त तक जांच के लिए 1100 रोगी पहुंचे। कुछ को जांच केबाद दवा देकर छोड़ दिया गया तो कुछ केवल एक दिन की देखरेख के बाद घर भेज दिए गए। गंभीर तौर पर भर्ती मरीजों के अलावा शहर से 52 मरीज इलाज के लिए पीजीआई और दिल्ली भेजे गए, यह भी हैरान करने वाला आंकड़ा है। मानसून इस कदर खतरनाक हो चला है कि कई ऐसे लोग जिन्हें पहली बार अटैक पड़ा, जान गंवा बैठे। स्वरूपरानी, बेली, सरस्वती हॉर्ट केयर, हॉर्ट लाइन, जीवन ज्योति समेत विभिन्न अस्पतालों के रजिस्टर देखें तो पहली बार अटैक वाले 22 लोगों की जान जा चुकी है। पहली बार अटैक वाले 40 अन्य मरीज भर्ती हैं जिनमें से 15 की स्थिति खराब है। सलोरी निवासी राजस्व कर्मी विवेक त्रिपाठी, किराना व्यवसायी सुमंत अग्रवाल को दो दिन पहले ही अटैक पड़ा। पहली दफे अटैक में ही दोनों की हालत इस कदर खराब है कि उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। काम के साथ बढ़ी बीमारी ः अस्पताल में भर्ती होने वालों में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है जो दुकान में देर तक बैठते हैं, दफ्तरों में देर तक काम करते हैं। कम्प्यूटर पर ज्यादा वक्त बिताने वाले भी दिल के रोगी हो गए। संगठन की रिपोर्ट से साफ है कि नियमित दिनचर्या जीने वालों की तुलना में लंबी अवधि तक काम करने वालों को बीमारी कम उम्र में ही जकड़ ले रही है। पेट और घुटने के बीच चर्बी दिल के लिए खतरनाकः अगर आपकी कमर और जांघ का हिस्सा लगातार चौड़ा हो रहा है, अतिरिक्त चर्बी बढ़ रही है, पांच से छह घंटे कुर्सी पर बैठने वाला काम करना पड़ता है, देर रात जागना, सुबह देर से उठना पड़ता है तो समझिए बड़ा खतरा आपके सिर पर मंडरा रहा है। बैरहना निवासी डॉ.केशव प्रसाद जायसवाल, गोविंदपुर निवासी डॉ.पीके त्रिपाठी के मुताबिक जांच में यह सामने आया कि ऐसे लक्षण वाले लोगों में बीमारी तेजी से बढ़ रही है।