इलाहाबाद। तीन हफ्ते से गंगा-यमुना की बाढ़ झेल रहे बाढ़ पीड़ितों कोे यह खबर थोड़ी परेशान कर सकती है। चंबल और अलकनंदा में भारी उफान के कारण तय है कि कुछ दिनों में नदियों का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ेगा। फिलहाल दोनों नदियों का जलस्तर कम हो रहा है लेकिन इसकी धीमी गति और पीछे से तेजी से आ रहे पानी को लेकर प्रशासन चिंतित है। सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में गंगा यमुना में दस लाख क्यूसेक से अधिक पानी है, जिसकी वजह से अभी स्थिति खतरनाक बनी हुई है।
भले ही इलाहाबाद और आसपास भारी बरसात न हो रही हो लेकिन मध्य प्रदेश से यमुना में मिलने वाली नदियां चंबल, केन, बेतवा में बाढ़ केहालात हैं। इसी तरह अलकनंदा में भारी बाढ़ से गंगा में पानी बढ़ा है। इलाहाबाद को इसी का नतीजा भुगतना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा के मुताबिक यमुना का जलस्तर कम होने से थोड़ी राहत मिली है। पहले यमुना के बैक फ्लो वाटर से गंगा का जलस्तर बढ़ गया था लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है। अब गंगा का बैक फ्लो यमुना की ओर है लेकिन यदि आने वाले दिनों में यमुना का अपना जलस्तर बढ़ता है तब हालात खराब हो सकते है। केंद्रीय जल आयोग और बाढ़ प्रखंड अधिकारियों के मुताबिक गंगा का पानी तेजी से वाराणसी और पटना की ओर से निकल रहा है जिससे काफी राहत मिली है। यदि वाराणसी, पटना केअलावा आगे अच्छी बारिश होती है और इन शहरों में नदी का जलस्तर स्थानीय स्तर पर बढ़ता है तो इसका सीधा असर जलप्रवाह पर पड़ेगा।