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संग्रहालय को नहीं स्वतंत्रता सेनानियों की सुधि

Thu, 15 Aug 2013 05:34 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। यह हैरत की बात किंतु सच है कि राष्ट्रीय स्तर पर कला, इतिहास और संस्कृति से जुड़े दुर्लभ नमूनों को संग्रहीत करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय फलक से जोड़ने के लिए ब्रिटिश म्युजियम तक से हाथ मिलाने वाले इलाहाबाद संग्रहालय की ओर से स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी धरोहर के संग्रह, संरक्षण के लिए कोई सार्थक कोशिश नहीं की गई। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के डेढ़ सौ वर्ष बीतने के बावजूद संग्रहालय में शहीदों को कोई जगह नहीं मिल सकी है। यह चर्चा सिर्फ इलाहाबाद में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मौलवी लियाकत अली तक ही सीमित करें तो संग्रहालय के पास उनकी मूल तस्वीर तक नहीं है।
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दो दशक पूर्व तैयार ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीथिका’ में मौलवी लियाकत अली के कुर्ते-पायजामे और हाल में रखी चंद्रशेखर आजाद की पिस्तौल के सिवा संग्रहालय में इलाहाबाद के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी कोई चीज नहीं है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के सपूतों, शहीदों का न तो कोई चित्र और न ही कोई विवरण जुटाया जा सका है। वीथिका को नया रूप देने के नाम पर बीते दिनों मौलवी लियाकत अली की चीजें भी हटा दी गईं। उनके परिजनों की ओर से जो तलवार दी गई थी, विवादित होने के कारण ‘रिजर्व कलेक्शन’ में रखी है। दरअसल क्रांति के बिगुल के बाद चायल के महगांव के जमींदार काजी मौलवी लियाकत अली ने सात जून को इलाहाबाद आकर आंदोलन की कमान संभाल ली थी, जिन्हें बहादुरशाह जफर दो फरवरी 1857 को ही इलाहाबाद का गवर्नर नियुक्त कर चुके थे।
मौलवी के परपोते काजी नसीम अहमद के मुताबिक उनके वंशजों की ओर से आनंद भवन में पंडित जवाहर लाल नेहरू को मौलवी साहब के कुर्ते-पायजामे सहित खुसरोबाग की चाभी भेंट की गई थी, जिसे बाद में पंडित नेहरू ने इलाहाबाद संग्रहालय को सौंप दिया था। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने माना कि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को संजोने के लिए वास्तव में अब तक कोई सार्थक पहल नहीं की जा सकी है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए संग्रहों की खरीद या अन्य माध्यमों से स्वंतत्रता संग्राम और सेनानियों से जुड़ी चीजों का संग्रह करके उनसे वीथिका समृद्ध की जाएगी।
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