इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाने की मांग के विरोध में वकीलों ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। बुधवार को आयोजित आम सभा में समाज के अन्य वर्गों और राजनीतिक दलों से भी समर्थन मांगने की घोषणा की गई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों, जिला और तहसील की बार एसोसिएशन के अलावा बुद्धिजीवियों, व्यापारियों और तमाम कर्मचारी संगठनों से भी सहयोग मांगेगा। बार की मीटिंग में यह मुद्दा भी उठा कि इलाहाबाद से एक-एक करके तमाम मुख्यालय हटाए जा रहे हैं। यह नगर की अस्मिता का सवाल है। इस मुद्दे पर सभी को एकजुट होना चाहिए।
हाईकोर्ट बार के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने घोषणा की कि शुक्रवार को भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। अध्यक्ष कंदर्प नारायण मिश्र शीघ्र ही केंद्रीय विधि मंत्री और मुख्य न्यायाधीश से समय लेकर प्रतिनिधि मंडल के साथ मिलेंगे। उपाध्यक्ष अतुल पांडेय ने बेंच गठन को राजनीतिक षड़यंत्र करार देते हुए इसे असंवैधानिक बताया। पूर्व महासचिव अनिल तिवारी ने सुप्रीमकोर्ट की बेंच इलाहाबाद में बनाने की मांग की। बैजंत कुमार मिश्र ने कहा कि बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तथा लखनऊ खंडपीठ में तीन मंडल ले जाने की योजना बनाई जा रही है। अधिवक्ता इसका भी पुरजोर विरोध करेंगे। सभा को संबोधित करने वालों में अनिल सिंह बिसेन, शैलेंद्र कुमार द्विवेदी, प्रमोद कुमार सिंह, जमील अहमद, योगेश दत्त, राजेश खरे, सत्यम पांडेय, स्वर्णलता सुमन, आनंद मिश्र, आशुतोष शुक्ला आदि अधिवक्ता शामिल थे। अधिवक्ता 16 अगस्त को भी आम सभा करेंगे।
बेंच विभाजन के मुद्दे पर हाईकोर्ट के कर्मचारी भी अधिवक्ताओं के साथ हैं। हाईकोर्ट अधिकारी-कर्मचारी संघ के महासचिव बृजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ताओं के आंदोलन में कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगे। यदि अधिवक्ता नहीं चाहते हैं कि हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बने तो हम उनके साथ हैं।
बेंच विभाजन के मुद्दे पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण बार एसोसिएशन और ऋण वसूली अधिकरण बार के वकीलोें ने भी समर्थन की घोषणा की है। कैट बार के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि वह आंदोलन में हाईकोर्ट के वकीलों के साथ हैं। कैट के अधिवक्ता भी न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए आंदोलन में साथ देंगे। इसी क्रम में राजस्व परिषद बार एसोसिएशन के सदस्य भी समर्थन में न्यायिक कार्य से विरत रहे। उन्होंने राजस्व परिषद की सर्किट बेंच बनाने का विरोध किया। परिषद के महासचिव बालकृष्ण पांडेय ने इसे न्यायपालिका को कमजोर करने की साजिश बताया है।