इलाहाबाद। कोरल क्लब के चुनाव को लेकर मेन्स यूनियन को तगड़ा झटका लगा है। रेलवे प्रशासन ने चुनाव अधिसूचना को गलत करार देते हुए रद कर दिया है। आरोप है कि अध्यक्ष को अंधेरे में रखकर क्लब का चुनाव कराने की रणनीति बनाई गई। रेलवे प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया रोकने के साथ ही क्लब के प्रबंधन, वित्तीय और अन्य निर्णय पर भी शिकंजा कस दिया है। प्रशासन ने आदेश दिया है कि अध्यक्ष की अनुमति के बिना कोई फैसला नहीं लिया जा सकेगा। दूसरी ओर रेलवे प्रशासन के इस फैसले से विवाद बढ़ने की भी आशंका है।
रेलवे में कर्मचारी संगठनों की मान्यता के चुनाव में हुए उलटफेर के बाद से ही कोरल क्लब को लेकर खींचतान बढ़ गई है। इसे लेकर क्लब के सभी निर्वाचित पदों पर काबिज एनसीआरएमयू और एनसीआरईएस आमने-सामने हैं। पिछले दिनों क्लब की सदस्यता खुलने के बाद विवाद हुआ था। फिलहाल, रेलवे प्रशासन ने 30 अगस्त तक सदस्यता खोल रखी है। प्रशासन का तर्क है कि इलाहाबाद क्षेत्र में 7005 रेल कर्मचारी कार्यरत हैं जो क्लब की सदस्यता ले सकते हैं। वर्तमान में क्लब के सदस्यों की संख्या महज 597 है। इसमें ग्रुप डी और सी कर्मचारी ही सदस्य बन सकते हैं। एनसीआरईएस के महामंत्री आरपी सिंह का आरोप है कि सदस्यता खुलने के बाद क्लब के पदाधिकारियों ने बैक डेट में चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी, जो गलत है।
शिकायत के बाद डीआरएम के आदेश पर सीनियर डीपीओ ने नौ जुलाई को जारी चुनाव अधिसूचना रद कर दी है। तर्क दिया है कि यह अधिसूचना न्यायपूर्ण एवं औचित्यपूर्ण नहीं है। आदेश में सीनियर डीपीओ ने कहा है कि दो साल के लिए हुए चुनाव की अवधि 22 दिसंबर 2012 को ही खत्म हो चुकी है। सो, अध्यक्ष की अनुमति के बिना प्रबंधन, वित्तीय और अन्य निर्णय न लें। क्लब के प्रबंधन के लिए नए चुनाव की व्यवस्था की जा रही है।