इलाहाबाद (ब्यूरो)। सावन के दिन बीतने के साथ शिव मंदिरों में अभिषेक, अनुष्ठान का क्रम और तेज हुआ। दारागंज के दशाश्वमेध घाट पर भी कांवड़ियों की आमद में बढ़ोतरी हुई। दो-चार भोले भक्तों के अतिरिक्त जत्थों के रूप में भी कांवड़ियों का आना जारी है। वैसे तो भोले को रिझाने के लिए कांवर को आकर्षक तरीकेसे सजाने और भोले के गीतों को गाते-गुनगुनाते हुए वह शिव धाम जाते हैं लेकिन सावन के दिन बीतने के साथ अब कावंड़ियों की टोलियां मंदिरनुमा रथ लेकर भी जलभरने के साथ शिवधामों के लिए रवाना हो रही हैं।
भोले के आकर्षक चित्र के साथ फूलों से सजे रथ पर साउंड बॉक्स भी लगे होते हैं जिनसे शिव के भजन गूंजते रहते हैं। मंदिरनुमा रथ पर लगा केसरिया ध्वज उनका पथप्रदर्शक भी होता है। दशाश्वमेध घाट पर जल भरकर काशी के लिए रवाना हुए, जारी से आए कावंड़ियों के जत्थे के प्रमुख रामकैलाश शुक्ल के मुताबिक रथ पर लगा केसरिया ध्वज पथप्रदर्शक के रूप में जत्थे के सदस्यों को भटकने नहीं देता, वहीं रथ पर गूंजते भोले के भजन कांवड़ियों में जोश भरते, जगाए रखते और निरंतर आगे बढ़ने को प्रेरित करते रहते हैं।
सावन में भोले के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। मनकामेश्वर सहित कई शिवस्थानों पर उनकी कतारें भी लगने लगी हैं। शिव मंदिरों के परिसरों में शिवस्तोत्र पाठ और रुद्राभिषेक का क्रम भी जारी है। सावन में घरों की दिनचर्या भी बदल गई है, अब सुबह अभिषेक के बाद शाम को आरती. भजन, प्रसाद के बाद ही महिलाएं दूसरे कामों में जुटती हैं। भोले के मंदिरों के इर्द-गिर्द चहल-पहल बढ़ गई है।