इलाहाबाद। थानेदार आरपी द्विवेदी को शूट कर फरार हुई बदमाश कंपनी ने रीवा में पहना हासिल की थी। रीवा के जवां इलाके में अमित तिवारी के मामा का घर है। तीनों बदमाश सीधे मामा के घर पहुंचे थे। वहां खाने-पीने के बाद तीनों ने आगे का रास्ता तय किया। रीवा तक बदमाश इंडिगो लेकर पहुंचे थे। जांच में जुटी पुलिस अमित के मामा के घर रीवा तक पहुंची तो कई रहस्य खुले थे। यहीं से पुलिस का शक गहरा गया कि दरोगा को इन्हीं बदमाशों ने मारा है। रीवा के बोस तिवारी ने बैंक लूट की योजना तैयार की थी। उसी के कहने पर यह गिरोह लूट की वारदात करने जा रहा था। दरोगा की हत्या के बाद बोस तिवारी भी फरार हो गया। इससे भी पुलिस का शक गहरा गया था। कड़ी से कड़ी जोड़ती क्राइम ब्रांच कातिलों तक पहुंच गई। दरोगा की हत्या के बाद कातिलों ने कई लोगों को फोन किया था। हालांकि वह अपनी लोकेशन बदलते रहे जिससे पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी।
पुलिस को पुख्ता तौर पर यह जानकारी भी मिली है कि दरोगा की हत्या के बाद बदमाशों ने इंडिगो पर नई नंबर प्लेट लगाई थी। यह नंबर प्लेट बैंक लूट में इस्तेमाल होनी थी लेकिन दरोगा की हत्या से पूरा मामला बदल गया। नैनी केभीम सेन सिंह की इंडिगा में जो नंबर प्लेट लगाई गई थी, वह चंचल नाम के बदमाश के पास से मिली थी। वह कार चोरी में जेल जा चुका है। जिस कार चोरी में वह जेल गया था उसी नंबर को बदमाशों ने इस्तेमाल किया।
घूरपुर के गुड्डू तिवारी हत्याकांड की जांच पुलिस संजीदगी से करती तो शायद थानेदार आरपी द्विवेदी की हत्या की नौबत न आने पाती। बदमाशों को पकड़ने में की गई लापरवाही का नतीजा इतना गंभीर निकला। गुड्डू तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने महज एक आरोपी की गिरफ्तारी कर मामला खत्म कर दिया था। पुलिस के हत्थे चढ़े पवन मालवीय निवासी रेरा घूरपुर के घर गुड्डू हत्याकांड की साजिश रची गई थी। गांव के कमलेश मिश्रा से जमीन को लेकर उसका विवाद चल रहा था। गांव के भैय्यन पांडेय को जमीन बेंच दी। भैय्यन भी गुड्डू के आगे टिक नहीं सका। वह कमलेश से अपने पैसे वापस मांगने लगा तो कमलेश ने गुड्डू को रास्ते से हटाने की ठान ली। कमलेश, पवन मालवीय के जरिए गांव के ही कल्लू उर्फ अमित तिवारी से मिला। पवन की मध्यस्थता में उसके घर पर कमलेश व भैय्यन ने कल्लू और आदेश यादव, झंडी खटिक, अरुण दुबे उर्फ टुन गुरु सभी निवासी जगदीशपुर लालापुर के साथ पचास हजार में हत्या का सौदा तय किया। आदेश, झंडी, अरुण, कल्लू और कमलेश ने मिलकर गुड्डू को 24 अप्रैल को मार डाला। हत्याकांड में कल्लू और भैय्यन का भी नाम खुला था लेकिन पुलिस ने इनके नाम निकाल दिए थे।