इलाहाबाद। वाणिज्य कर विभाग में व्यापारियों की समस्याओं का अंत नहीं है। हालत यह कि एक-एक काम के लिए व्यापारियों को महीनों विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अब व्यापारियों के सामने नई समस्या वर्ष 2009-10 के कर निर्धारण को लेकर है। नियम के तहत इसका निस्तारण मई 2013 तक हर हाल में हो जाना चाहिए था लेकिन व्यापारियों को कर निर्धारण का आदेश आज तक नहीं मिला। व्यापारी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। अब उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति ने इस मामले में कमिश्नर से गुहार लगाने जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2009-10 में व्यापारियों ने कितना टैक्स अदा किया, यह उन्हें अब तक नहीं पता चल सका है, क्योंकि इस वित्तीय वर्ष का कर निर्धारण अब तक नहीं हो सका है। काल बाधित वर्ष होने के कारण 2009-10 के कर निर्धारण के मामलों का निस्तारण मई 2013 में हो जाना चाहिए। हालांकि उच्चाधिकारियों को दिखाने के लिए कर निर्धारण अधिकारियों ने आर-5बी रजिस्टर में निस्तारण की इंट्री दर्ज करके एडिशनल कमिश्नर एवं ज्वाइंट कमिश्नर से सत्यापित भी करा लिया लेकिन व्यापारियों को कर निर्धारण के आदेश जारी नहीं हुए। व्यापारी इसकी जानकारी के लिए कार्यालय पहुंचते हैं, उन्हें कुछ नहीं बताया जाता। इसे लेकर उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
विभाग के अधिकारी इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उधर, कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि अधिकारी किसी काम में विलंब करते हैं तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि व्यापारी ने टैक्स जमा करने या अन्य किसी मामले में देरी की तो नोटिस भेज दिया जाता है। उनका कहना है कि इस मामले में जल्द ही व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ लखनऊ में कमिश्नर से मिलकर शिकायत की जाएगी।