इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा कालेजों की अराजकता सिर्फ परिसर के अंदर ही नहीं बाहर का माहौल भी बिगाड़ रही है। प्रतियोगियों के लिहाज से शिक्षा का यह हब भी अब इस अराजकता से टूटने लगा है। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय के आसपास के कई कोचिंग संस्थानों ने खुद को समेट लिया है या पलायन के लिए मजबूर हैं। विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसर तथा कोचिंग संचालक इसके पीछे इस अराजकता को भी एक बड़ा कारण मान रहे हैं।
छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के बाद यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, जो अब भी जारी है। कोचिंग संचालन खुले तौर पर इसे स्वीकार नहीं कर रहे लेकिन छात्र नेता के नाम पर उनकी बेरुखी तथा बेबसी सब कुछ कह जाती है। सीएमपी डिग्री कालेज छात्रसंघ अध्यक्ष अजीत यादव पर एक कोचिंग संचालन के साथ मारपीट का आरोप तथा गिरफ्तारी के बाद कोचिंग संस्थानों से वसूली का मामला एक बार फिर गरमाया है। इस वसूली की वजह से ही छात्रसंघ चुनाव के दौरान विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र के सभी कोचिंग तकरीबन 15 दिनों तक बंद रहे। चुनाव के बाद भी वसूली का विरोध करने पर कुछ छात्र नेताओं ने संचालकों से न केवल मारपीट की बल्कि दबाव बनाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक, बोर्ड ऑफिस आदि स्थानों पर धरना प्रदर्शन भी किया। इससे कोचिंग संचालकों को की साख की चिंता भी सताने लगी है। ऐसे में उन्होंने पलायन का रास्ता अख्तियार किया है। विश्वविद्यालय के सामने बंद रोड पर एडेल्फी कैंपस में कई संस्थान थे लेकिन धीरे-धीरे वे बंद होने लगे। साई स्टडी सेंटर जार्ज टाउन से कंपनी गार्डेन के सामने शिफ्ट हो गया है। संजीव सर क्लासेज भी बंद रोड से कर्नलगंज शिफ्ट हो गया है। आनंद भवन के पास स्थित अशोक सिंह एकेडमी को भी दूसरे स्थान पर ले जाना पड़ा। इनके अलावा भी कई संस्थान हैं जिन्हें वहां से कहीं और ले जाने की प्रक्रिया शुरू है। साई स्टडी सेंटर के निदेशक आरसी मिश्रा का कहना है कि यदि कोई गरीब छात्र पहुंचता है तो खुद फीस माफ कर दी जाती है। ऐसे मामलों में छात्र नेताओं की भी सूनी जाती है लेकिन जोर-जबरदस्ती ठीक नहीं है। यह बड़ी समस्या है। संजीव सर क्लासेज के संजीव कुमार ने माना कि स्थान बदलने के पीछे वहां व्याप्त अराजकता भी एक कारण है। इस पर अंकुश लगना ही चाहिए।