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चयन को बनवा ली सिक्किम-मेघालय से डिग्री

Sat, 04 May 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कला शिक्षण, स्वास्थ्य शिक्षा तथा कार्यानुभव शिक्षा में संविदा अनुदेशक पदों पर नियुक्ति के लिए फरवरी-मार्च में आवेदन मांगा गया था। इन पदों के लिए चयन पूरी तरह से मेरिट पर आधारित होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदकों ने सिक्किम और मेघालय के दूरस्थ शिक्षा से जुड़े विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल कर आवेदन कर दिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आरंभिक जांच में पता चला कि इन विश्वविद्यालयों से बीएफए की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थी एक ही क्षेत्र के रहने वाले हैं। इन सभी ने आवेदन के समय मार्च 2013 में ही विवि से जारी डिग्री लगाई है।
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बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी कला शिक्षण के लिए संविदा अनुदेशक के पद के लिए कला विषय में डिप्लोमा, बीएफए और पेंटिंग में डिग्री वाले अभ्यर्थियों को आवेदन करना था। मेरिट पर सीधे चयन की चाह में बड़ी संख्या में छात्रों ने मार्च महीने में झटपट बीएफए की डिग्री हासिल कर आवेदन कर दिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से 30 अप्रैल को हुई काउंसिलिंग के बाद अभ्यर्थियों की ओर से जमा किए गए प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिक्किम एवं सीएमजे यूनिवर्सिटी मेघालय से बीएफए की डिग्री हासिल की है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों ने बताया कि इन संस्थानों में सिक्किम से बीएफए की डिग्री हासिल करने वाले अधिकांश अभ्यर्थी फूलपुर, उतरांव, हंडिया क्षेत्र के हैं, जबकि मेघालय से डिग्री लेने वाले अभ्यर्थी कोरांव क्षेत्र के हैं। इस आधार पर बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों को यह प्रमाण पत्र संदेह के दायरे में लगे।
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दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीएफए की डिग्री हासिल करने के सवाल पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्यकला विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय जैतली का कहना है कि यह मान्य नहीं हैं। उनका कहना है कि यूजीसी की ओर से अभी तक बीएफए को दूरस्थ शिक्षा से वैध घोषित नहीं किया गया है।
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