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गंगा की लहरों पर ‘सूर्य किरण मशाल ’

Sat, 04 May 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। सेना के मध्य कमान के 50वें स्थापना दिवस के मौके पर निकाली गई शांति एवं एकता की प्रतीक ‘सूर्य किरण मशाल ’ अपने अंतिम चरण में शुक्रवार को एक बार फिर इलाहाबाद पहुंची। सरस्वती घाट पर आयोजित रंगारंग कार्यक्रम के बाद सेना की 20 सदस्यीय ‘व्हाइट वाटर राफ्टिंग टीम’ मशाल लेकर वाराणसी के लिए रवाना हुई। तीन दिनों तक सफर के बाद मशाल छह मई को वाराणसी पहुंचेगी, जहां इसे गंगा में प्रवाहित किया जाएगा।
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‘सूर्य किरण मशाल ’ जैसे ही सरस्वती घाट पहुंची, बिहार रेजिमेंटर सेंटर के बैंड ने मधुर धुनों के साथ स्वागत किया। पूर्व उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया के जीओसी-इन-सी मेजर जनरल विशंबर दयाल (वीएसएम) ने मशाल को ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान पहले गंगा-यमुना की आरती की गई और फिर सब एरिया कमांडर ने टार्च को वाराणसी के लिए रवाना किया।
इस मौके पर सब एरिया कमांडर मेजर जनरल विशंबर दयाल ने कहा कि यह मशाल देश की एकता, शांति और मैत्री की प्रतीक है। मशाल ने देशवासियों और पूर्व सैनिकों को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया है। हमें एक ऊर्जावान समाज की स्थापना करनी है। सेना एक परिवार की तरह है। सेना की नई पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी को कतई नहीं भूलना चाहिए। सेना पर देश की रक्षा की महती जिम्मेदारी है जिसके लिए हर अधिकारी-सैन्यकर्मी को सजग रहना चाहिए।
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सेनाधिकारियों के मुताबिक मशाल यूपी, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा समेत सात राज्यों से गुजरने के साथ ही बरेली, पिथौरागढ़, जोशीमठ, लैंसडाउन, रायवाला, देहरादून, रुड़की, मेरठ, मैनपुरी, बांदा, सतना, जबलपुर, रामपुर, संबलपुर, कटक, भुवनेश्वर, रांची, दानापुर, गाजीपुर, इलाहाबाद, फैजाबाद और कानपुर होते हुए वाराणसी पहुंच रही है। सूर्य किरण मशाल ने पांच हजार किलोमीटर की दूरी तय की। मशाल को दो मार्च को बरेली से रवाना किया गया था।
सूर्य किरण मशाल को इलाहाबाद से वाराणसी गंगा की लहरों पर लेकर जाने के लिए सेना की विशेष राफ्टिंग टीम रुद्रप्रयाग से ऋषिकेश पहुंची। जहां टीम में शामिल अधिकारियों-जवानाें को पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। इससे पूर्व राफ्टिंग टीम गोमती नदी में भी सूर्य किरण मशाल को लेकर यात्रा कर चुकी है।
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