इलाहाबाद। रामबाग स्थित निंबार्क आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा के तहत रविवार को कथा व्यास डॉ. गिरिजाकांत शुक्ल ने भक्ति की महिमा बखानी। उन्होंने कहा, जो व्यक्ति ईश की भक्ति करता है, वह वैष्णव होता है और जिसके संग आने पर भगवान की भक्ति का रंग लग जाए, वह महान वैष्णव होता है। संत किसी वेशभूषा का नाम नहीं है, भीतर का वैराग्य ही संत का लक्षण है। संत तो सिर्फ परमात्मा की कृपा से ही मिलते हैं। संत वह दर्पण होता है जिससें जीव परमात्मा का दर्शन कर सकता है।
वस्तुत: भजन के लिए अनुकूल समय की प्रतीक्षा नहीं की जाती है, उसके लिए कोई भी समय अनुकूल है। जब मनुष्य भक्ति पथ पर आगे चलता है तो उसे अनेक बाधाएं मिलती हैं लेकिन ईश्वर से कृपा से ही वह दूर भी होती हैं। उसकी कृपा से ही व्यक्ति में सभी प्रकार के सद्गुण आते और उसके विमुख होने पर उसमें सभी प्रकार के दुर्गुण आ जाते हैं। आश्रम के व्यवस्थापक लक्ष्मीकांतम के मुताबिक कथा पहली मई तक रोजाना शाम छह बजे से होगी।
मनकामेश्वर संगीत समिति के तत्वावधान में सोमवार को मनकामेश्वर मंदिर परिसर में शाम छह बजे से भक्ति संगीत संध्या आयोजित की जाएगी। संयोजक मनोज गुप्ता के मुताबिक इसमें संगीत की तीनों विधाओं गायन, वादन, नृत्य के माध्यम से नवोदित और स्थापित दोनों ही कलाकार प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।