इलाहाबाद। अगर आप इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) की गोविंदपुर और झूंसी नई स्कीम में फ्लैट लेने की सोच रहे हैं तो कागजात की पड़ताल कर लें। जिस उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) के कारण शहर की कई बड़ी कालोनियों, मोहल्लों में काम ठप है, बड़े प्रोजेक्ट अटके हैं, एडीए की दो प्रस्तावित स्कीम उसके दायरे में है। एचएफएल प्रभावित क्षेत्र में नए निर्माण पर रोक है। कई जगह ऐसे मामलों में काम रुकवा दिया गया लेकिन अब एडीए ने खुद ही प्रभावित क्षेत्र में निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। हद तो यह कि एडीए बोर्ड बैठक में कमिश्नर ने भी ग्रुप हाउसिंग को हरी झंडी दे दी।
एडीए ने गोविंदपुर आवास योजना में खाली पड़ी 6481 वर्गमीटर जमीन पर सात मंजिल की ग्रुप हाउसिंग बनाने की तैयारी की है। योजना में जिस जमीन पर ग्रुप हाउसिंग बनाई जानी है, वह पूर्व में ऑक्सीडेशन पॉड के लिए प्रस्तावित थी लेकिन सलोरी एसटीपी बनने के बाद इसकी आवश्यकता खत्म हो गई। गोविंदपुर आवास योजना के सलोरी उपरहार में अमिताभ बच्चन नाले से लगी आराजी नंबर 227, 228, 229, 230, 231, 232, 233 तथा आराजी नंबर 218 एवं 219 एचएफएल से पांच सौ मीटर के दायरे में है, जहां निर्माण पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। एडीए ने यहां टू बीएचके के 40, टू बीएचके स्टडी के साथ 20, थ्री बीएचके के 80 फ्लैट तथा चार पेंट हाउस (विशेष डुप्लेक्स) बनाने की तैयारी की है।
छोटे से छोटा नक्शा पास करते वक्त एडीए सारे पहलुओं की तहकीकात करता है लेकिन इन मामलों में विभाग ने सारे नियमों को किनारे कर दिया। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद एडीए अफसरों ने लाखों रुपये खर्च कर कन्सल्टेंट से ग्रुप हाउसिंग की डिजाइन तैयार कराई। इसका विस्तृत विवरण भी बन गया। अलकनंदा नाम की इस ग्रुप हाउसिंग को पिछले दिनों एडीए बोर्ड की बैठक में हरी झंडी मिल गई। इसी तरह झूंसी के पुरेसुरदास एवं सुनौटी गांव के पास कांशीराम आवास योजना के बगल में एडीए सरस आवास योजना के नाम से 81 फ्लैटों की ग्रुप हाउसिंग बनाने जा रहा है। यह क्षेत्र भी एचएफएल के दायरे में है। एडीए ने यहां फ्लैटों के लिए आवेदन पत्र ले लिए हैं और छह मई को लाटरी के जरिए फ्लैटों का आवंटन भी होने जा रहा है।