इलाहाबाद। कुंभ के तहत स्थायी कार्यों के मिले अरबों रुपये से शहर भर को चमकाया गया लेकिन संगम नगरी का एक बड़ा हिस्सा विकास कार्यों से अछूता ही रहा। कुंभ के तहत स्थायी कार्यों के लिए आवंटित तीन अरब 72 करोड़ 72 लाख 65 हजार 763 रुपये में तीन अरब 65 करोड़ 64 लाख 82 हजार 534 रुपये खर्च किए गए और 14 मार्च तक सात करोड़ सात लाख 83 हजार 229 रुपये सरकारी खजाने में ही पड़े रह गए। कुंभ के बाद अब इस बजट को तेजी से खपाया जा रहा है ताकि बची हुई रकम को किसी तरह 31 मार्च से पहले खर्च कर दिया जाए और पैसा वापस करने की जरूरत न पड़े।
इस जल्दबाजी में धोबीघाट, लोक सेवा आयोग, बालसन चौराहा कुंभ के बाद रातों-रात बनाकर तैयार कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज चौराहे के पास महात्मागांधी रोड पर इंटरलॉकिंग का काम भी कराया गया और इन दिनों लाउदर रोड पर जॉर्जटाउन चौराहा के चारों तरफ सड़क पर मैस्टिक एस्फाल्ट बिछाने का काम चल रहा है। बजट का एक बड़ा हिस्सा कुंभ के बाद जल्दबाजी में खर्च किए जाने से गुणवत्ता की निगरानी भी मुश्किल हो गई है। कुंभ से पहले जिन कार्यों पर सीधे डीएम और कमिश्नर निगरानी रख रहे थे, उन कार्यों की तरफ कोई देखने वाला नहीं। कुंभ से पहले बनी सड़कों, नालों, चौराहों की निर्माण सामग्री की जांच सीधे एमएनएनआईटी से कराई गई। जांच के लिए एमएनएनआईटी को नमूने भेजे गए लेकिन अब संबंधित विभाग के आला अधिकारी भी जांच के लिए मौके पर नहीं पहुंच रहे। सबकुछ ठेकेदारों पर छोड़ दिया गया है। बजट को जैसे-तैसे खपाना है। भले ही निर्माण दोयम दर्जे का हो। गड़बड़ी की आशंका इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि पहले जिन कार्यों को पूरा करने में एक हफ्ते का समय लगा, वही काम अब एक दिन में निपटा लिए जा रहे हैं। अब तक किसी भी एजेंसी से गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई है और न ही जिले के किसी बड़े अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर कोई निरीक्षण किया है।