यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 12 मार्च से शुरू हो रही है। परीक्षा आरंभ होने के एक दिन पहले तक जिला मुख्यालय से प्रश्नपत्र के पैकेट केन्द्रों तक नहीं पहुंचे। परीक्षा शुरू होने के सप्ताह भर पहले विद्यालयों में पहुंचने वाली उत्तर पुस्तिकाएं (कॉपी) भी नहीं पहुंच सकी।
परीक्षा सामग्री नहीं पहुंचने के बारे में जानकारी के लिए छुट्टी के दिन भी प्रधानाचार्य बोर्ड कार्यालय का चक्कर काटते रहे। प्रदेश के सभी जिलों से यह शिकायत मिल रही है कि बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र गलत भेज दिए गए। इसमें परीक्षार्थी के नाम से लेकर विषय, परीक्षा केन्द्र कई प्रविष्टियां गलत भर दी गई हैं।
परीक्षार्थी इसे सुधरवाने के लिए प्रधानाचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक और बोर्ड कार्यालय के पास पहुंचते रहे। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के परीक्षा केन्द्र गलत भेज दिए जाने से परेशानी बनी हुई है। मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से केन्द्र व्यवस्थापक प्रवेश पत्र की गड़बड़ी की शिकायत लेकर मुख्यालय पहुंचे।
बोर्ड परीक्षा से पहले कॉपी नहीं पहुंचने से केन्द्र व्यवस्थापक परेशान हैं। गाजीपुर से आए एक केन्द्र व्यवस्थापक का कहना था कि उनके विद्यालय में अभी तक कॉपी नहीं पहुंची है, ऐसे में परीक्षा के दौरान परेशानी हो सकती है। पंजीकरण फॉर्म से इतर प्रवेश पत्र भेज दिए जाने से बड़ी संख्या में विद्यालयों के प्रधानाचार्य अपनी शिकायत को लेकर परेशान रहे।
बोर्ड की ओर से परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए लगातार परेशानी दूर की जा रही है। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने मनमाने तरीके से परीक्षा केन्द्र आवंटन का भी बोर्ड के अधिकारियों पर आरोप लगाया है जबकि बोर्ड के सचिव उपेंद्र कुमार का कहना है कि परीक्षा केन्द्र का निर्धारण जिला समिति की रिपोर्ट पर किया गया है। ऐसे में बोर्ड के अधिकारी केन्द्र आवंटन के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।