इलाहाबाद। छात्रावासों के वर्चस्व की लड़ाई तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन का उपेक्षात्मक रवैया किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे सकता है। यह पहला अवसर नहीं है जब दो छात्रावासों के छात्रों की लड़ाई में परिसर तथा आसपास का क्षेत्र अशांत हुआ है। पिछले एक पखवारा में ही अंत:वासी आधा दर्जन बार एक-दूसरे के सामने आ चुके हैं तथा उन्होंने जमकर आगजनी भी की। इसके विपरीत वार्डेन-अधीक्षक की सक्रियता का यह आलम है कि कई मामलों में वे घटना को सिरे से नकारते रहे जबकि, छात्रों की ओर से ही 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखाई गई। लगातार घटनाओं से छात्रावासों में तनाव बढ़ता जा रहा है तो अफसरों के इस रुख से छात्रों का हौसला भी बढ़ता जा रहा है, जिसके गंभीर परिणाम का अंदेशा बन गया है।
आपसी रंजिश के साथ आसपास के बाजारों में दुकानदारों से भी छात्रों का कई बार टकराव हुआ। इसके मद्देनजर हर हॉस्टल में कमेटी गठित करने समेत कई कदम उठाए गए लेकिन अफसरों की खींचतान के कारण सामंजस्य बैठाने की यह कवायद सिर्फ दिखावा ही साबित हो रही है। प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव की घटना को लेकर मुसलिम बोर्डिंग और हिन्दू छात्रावास के छात्रों के बीच बृहस्पतिवार की रात में टकराव हो गया था। इससे पहले मुसलिम बोर्र्डिंग और जैन हास्टल के छात्रों के बीच जमकर मारपीट तथा तोड़फोड़ हुई थी। इसमें छात्रों की आरे से ही 100 से अधिक छात्रों के खिलाफ एफआईआर लिखाई गई। खास यह कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब भी मानने को तैयार नहीं है कि इसमें हॉस्टल के छात्र शामिल हैं। इससे कुछ दिन पहले भी हिन्दू हॉस्टल और केपीयूसी के छात्रों के बीच टकराव बच गया था। अब ताराचंद और केपीयूसी के छात्रों के बीच तांडव। इन दिनों विश्वविद्यालय की परीक्षाएं शुरू हैं। साथ में भर्ती परीक्षाएं का दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे में छात्रावासों में तनाव तथा आशंकाओं के कारण छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो गई है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल नहीं होने को लेक र एक नया विवाद शुरू हो गया है। यह पहली घटनी नहीं है जब लगातार फोन करने के बावजूद फोर्स पहुंचने में काफी वक्त लगा। परिसर में लगातार अराजकता का माहौल है, लेकिन पुलिस प्रशासन पूरी तरह से उपेक्षात्मक रवैया अपनाए हुए है। विश्वविद्यालय के अफसरों का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से डीएम, एसएसपी के साथ गृह सचिव को भी पत्र लिखा गया लेकिन फोर्स उपलब्ध नहीं हुई। आलम यह है कि विश्वविद्यालय चौकी की पुलिस की तैनाती भी कहीं और की जा रही है। चीफ प्रॉक्टर के अनुसार उन्हें मिले सिपाही भी बुला लिए गए हैं। विश्वविद्यालय परिसर स्थित चौकी में इंचार्ज समेत आठ पुलिस कर्मियों की तैनाती है।
परिसर में छात्रसंघ चुनाव के समय से ही अराजकता का माहौल है। जनवरी से तो लगातार तनाव बना हुआ है। 17 जनवरी को कुलपति के साथ हाथापाई के मामले में इमरान अंसारी नामक छात्र को निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद दो फरवरी को कुलपति कार्यालय में ही मारपीट, तोड़फोड़ के मामले में छात्रसंघ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत चार के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके बाद बने तनाव को देखते हुए कई दिन परिसर में छुट्टी भी कर दी गई। तनाव और आशंकाओं के बीच 11 फरवरी को परिसर खुला लेकिन मांग के बावजूद फोर्स उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके बाद परिसर में लगातार आंदोलन चले। कुलपति कार्यालय में दोबारा तोड़फोड़ हुई। पिछले सप्ताह प्रॉक्टर समेत अन्य अफसर नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बने रहे लेकिन फोर्स शाम को पहुंची। हालांकि छात्रों के आंदोलन के बाद सभी को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई है। इसके बाद छात्र शांत जरूर हो गए हैं लेकिन तनाव बना हुआ है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. माता अंबर तिवारी का कहना है कि शनिवार को भी उन्होंने सभी अफसरों को स्थिति से अवगत कराने के साथ फोर्स उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थानों की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में इस समय लैपटॉप योजना के तहत आवेदन मांगे जाने को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। छात्र-छात्राओं के लिए तैयारी के लिहाज से यह समय काफी महत्वपूर्ण है लेकिन उनका पूरा वक्त आय प्रमाणपत्र बनवाने तथा अन्य कागजात तैयार करने के साथ लाइन में बीत रहा है। विश्वविद्यालय में आगजनी के पीछे इसे भी एक कारण माना जा रहा है। इसको लेकर छात्र-छात्राओं में नाराजगी भी है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में बवाल के कारण शनिवार को लैपटॉप योजना के फार्म जमा नहीं हुए लेकिन सोमवार को आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। फार्म डीएसडब्ल्यू कार्यालय में दिन में 10.30 से दो बजे के बीच जमा होंगे। आवेदन की आखिरी तारीख 13 मार्च है।