महाकुंभ नगर। श्रीमद्भागवत के आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने रविवार को भक्ति की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा, बचपन में की गई भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ होती है। परमेश्वर को पाने के लिए भक्तिभावना जरूरी है जिसके लिए बचपन सर्वश्रेष्ठ समय है। ध्रुव और प्रह्लाद जैसे भक्तों ने बचपन से ही प्रभु भक्ति में चित्त लगा दिया था तभी तो भगवान ने उन्हें साक्षात दर्शन देकर उनकी भक्ति को अमर कर दिया।
कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर आठ स्थित शिविर में उन्होंने कहा, बालपन में ही संस्कारों की दीक्षा मिलनी चाहिए। बालक के चरित्र निर्माण में मां का सबसे बड़ा योगदान होता है। इसीलिए संतान को बदले की भावना नहीं बल्कि सच्चाई की सीख देनी चाहिए। अपने बेटे को भी वैसा ही बनाना चाहिए जैसा जमाई चाहते हो। इसी तरह अपनी बेटी को ऐसे संस्कार देना चाहिए जैसी बहू चाहते हो।
उन्होंने कहा, वासनाओं और इच्छाओं की पूर्ति कभी नहीं होती। इसीलिए जरूरी है कि इच्छाओं को मत पालो। मन को ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दोगो तो न इच्छाएं रहेंगी और न दोबारा जन्म लेना पड़ेगा। मुख्य यजमानों ने भागवत की आरती उतारी। कार्यक्रम जगदीश प्रसाद सिंघल, मुन्नी रानी, सुरेश-शशि अग्रवाल, विजय शर्मा, जगदीश वर्मा, अंतरिक्ष, श्याम सुंदर, प्रदीप, किशन आदि शामिल थे।
कक्षा की शुरुआत से पहले गंगा रक्षा के लिए काम करने वाले अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता से यमुना की दशा-दिशा पर बात की। उन्होंने गंगा की तरह ही यमुना के स्वरूप को बचाए रखने कोे संभावित प्रयासों सहित सरकार तथा आम जनता को इस दिशा में जागरूक करने के उपायों पर चर्चा की। विमर्श में एके श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र शर्मा, नागेंद्र नाथ द्विवेदी आदि मौजूद थे।