जाने-माने निर्माता निर्देशक महेश भट्ट शनिवार की शाम कुंभ नगर पहुंचे। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष और गंगा एक्शन परिवार के मुखिया स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि जी से मुलाकात की।
उनसे संगम, निर्मल गंगा और इसके लिए जनसहयोग, जनजागरूकता सहित धर्म और समाज से जुड़े तमाम मुद्दों पर देर तक मंथन किया। इस दौरान उन्होंने गंगा की मौजूदा दशा-दिशा की जानकारी हासिल करने के साथ गंगा पर बनी छोटी-छोटी कई फिल्में भी देखीं।
संगम की रेती पर पहुंचकर महेश भट्ट काफी खुश दिखे। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, वैसे तो मेरा इलाहाबाद आने का कोई कार्यक्रम नहीं था लेकिन शुक्रवार को वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान स्वामी जी से मुलाकात के बाद उनका आत्मीय निमंत्रण मिला तो मैं अपने आप को यहां आने से रोक नहीं सका। वास्तव में महाकुंभ का आयोजन ‘अनपैरलल’ है, इसे ‘मदर ऑफ इवेंट’ कहा जाना चाहिए।
भट्ट ने चिदानंद की तारीफ की। कहा कि ‘गंगा के लिए वह अद्भुत काम कर रहे हैं, इस अभियान में हम सब लाउडस्पीकर की तरह जुड़ सकते हैं जो उनके संदेश को दूर-दूर तक अपने प्रशंसकों तक पहुंचाएं। यहां से मुझे बहुत कुछ सीखने-समझने का मौका मिला है।
मेरी कोशिश है कि वर्ष के अंत तक गंगा पर कोई फिल्म बने जिसमें तमाम चीजें किसी न किसी रूप में शामिल हो सकें।’ राजकपूर की ओर से गंगा पर फिल्म की कोशिश को उन्होंने सराहा लेकिन यह भी जोड़ा कि अब वैसी बात नहीं रही। पूरी तरह से गंगा पर वैसी ही फिल्म बनाने के लिए वैसा ही ‘पैशन’ चाहिए। वही व्यक्ति सच्चे तौर पर गंगा पर वैसी फिल्म बना सकता है जो उससे भीतर से जुड़ा हो।