इलाहाबाद। नगर निगम और वन विभाग की आपसी लड़ाई का खामियाजा अल्लापुर के एक युवक को जान गंवाकर चुकानी पड़ी। बंदरों के समूह से बचने के लिए युवक ने तिमंजिला मकान की छत से छलांग लगा दी। गंभीर रूप से घायल युवक की अस्पताल में मौत हो गई। घटना से गुस्साए लोगों ने बृहस्पतिवार को डीएम कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर बंदरों की धरपकड़ की गुहार लगाई है।
बताते हैं कि अल्लापुर के रामानंद नगर में स्टोव वाली गली में उमेेश जायसवाल की टेंट की दुकान है। मध्य प्रदेश के रामविशाल का पुत्र ब्रजलाल (25) उमेश की दुकान पर काम करता है और उन्हीं के घर में रहता भी है। बुधवार की सुबह करीब आठ बजे वह तिमंजिले मकान की छत पर बैठा हुआ। इसी दौरान बंदरों का झु़ंड पहुंच गया। चारों ओर से बंदरों से खुद को घिरा देख ब्रजलाल ने भागने की कोशिश की। बंदरों के दौड़ाने पर बचने के लिए वह छत से नीचे कूद पड़ा। छत से युवक के गिरता देख आसपास के लोग दौड़ पड़े। उसे गंभीर हालत में देख मोहल्ले के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। देर शाम युवक की मौत हो गई।
मोहल्ले वालों की शिकायत है कि पिछले दो महीने से बंदरों का आतंक छाया हुआ है। बंदर अब तक दर्जनों लोगों को काट चुके हैं। नगर निगम से इनकी धरपकड़ के लिए गुहार भी लगाई गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गुस्साए लोगों ने सुबह पार्षद शिवसेवक सिंह की अगुवाई में डीएम कार्यालय पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। अफसरों के न मिलने पर डीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर बंदरों की धरपकड़ की मांग की।
0 दर्जनभर मोहल्लों में है आतंक
काटने वाले बंदरों का शहर के दर्जनभर मोहल्लों में जबरदस्त आतंक है। रामानंद नगर, सर्वोदय नगर, शिव नगर, किदवई नगर, संजय नगर, साउथ मलाका, नार्थ मलाका, सलोरी, चांदपुर सलोरी, सदियाबाद, गोविंदपुर, सिविल लाइंस, करेली क्षेत्रों में अब तक बंदर दर्जनों लोगों को घायल कर चुके हैं। कई मोहल्लों ने महिलाओं और बच्चों ने घरों की छतों पर बैठना बंद कर दिया है। कपड़े सुखाने के लिए पूरा परिवार लाठी-डंडों से लैस होकर छतों पर जाता है।
0 कार्रवाई होती तो बच जाती जिंदगी
सितंबर और अक्तूबर में बंदरों शहर के बड़े हिस्से में लोगों में खौफ पैदा कर रखा था। इसे लेकर पार्षदों के विरोध और मांग पर डीएम राजशेखर ने नगर निगम और वन विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर कार्रवाई का निर्देश दिया लेकिन दोनों विभागों ने धरपकड़ नहीं की।
0 ‘बंदर वन संरक्षित प्राणी हैं। विशेष सचिव नगर विकास ने नगर निगम को इनकी धरपकड़ करने से रोका है। साथ ही निगम के पास इन्हें पकड़ने के लिए न फंड है और न ही स्टॉफ। वन विभाग कार्रवाई करेगा तो उसे वाहन मुहैया करा दिए जाएंगे।’
डॉ. धीरज गोयल
पशुधन अधिकारी
नगर निगम
‘यह काम वन विभाग का नहीं है। आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए नगर निगम हर साल लाखों रुपए लेता है। बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी भी उसी की है। वन विभाग के प्रमुख सचिव ने विभागीय अफसरों को इसकी धरपकड़ से रोका है। बंदर वन्य जीव नहीं, पालतू हैं।’
अशोक दीक्षित
जिला वन अधिकारी