महाकुंभ नगरी। महाकुंभ मेला क्षेत्र में प्रवेश करते ही फोर्ट रोड चौराहा, झूंसी शास्त्री पुल, नैनी में अरैल के साथ नए और पुराने यमुना पुल पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगे हैं जिन पर पॉलीथिन प्रतिबंध का संदेश लिखा है। मेला प्रशासन ने भी दावा किया था कि मेला क्षेत्र नो पॉलीथिन जोन रहेगा लेकिन पहले शाही स्नान के दौरान ही इस दावे की हवा निकल गई ।
जिला प्रशासन, नगर निगम और मेला प्रशासन की ओर से पिछले तीन-चार महीने से पॉलीथिन के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियान का शाही स्नान में जरा भी असर नहीं दिखा। संगम की जाने वाली सभी सड़कों पर जगह-जगह पॉलीथिन का ढेर नजर आया। संगम जहां अखाड़ों के साधु-संतों के साथ लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया, वहां भी हर तरफ पॉलीथिन बैग और प्लास्टिक के गिलास बिखरे नजर आए। यह बात अलग रही कि साफ-सफाई के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सैकड़ों सफाई कर्मचारी लगाए, जो हर वक्त पॉलीथिन और प्लास्टिक के गिलासों को सड़कों से बीनते रहे।
एक अनुमान के मुताबिक पहले शाही स्नान में मेला क्षेत्र से तकरीबन तीन मीट्रिक टन कचरा निकला, जिसमें बड़ी मात्रा पॉलीथिन और प्लास्टिक के गिलास की रही। यही नहीं सिविल लाइंस, लीडर रोड, पुरानी जीटी रोड, तेलियरगंज, अल्लापुर आदि से मेला क्षेत्र में आने वाली सड़कों पर कई संगठनों की ओर से भोजन, प्रसाद आदि के साथ पानी की भी व्यवस्था की गई लेकिन पानी के लिए गिलास प्लास्टिक के ही दिखे। इसके अलावा दारागंज, बैरहना, कीडगंज, सोहबतियाबाग आदि में चाय की दुकानों पर प्लास्टिक के गिलास में चाय दी गई। नगर निगम के पर्यावरण विभाग की ओर से शहर में जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद कहीं भी प्रतिबंध का असर नहीं दिखा।