इलाहाबाद। मकर संक्रांति पर देर रात कुंभनगरी पहुंचे संत आसाराम ने सबसे पहले खुद को विवादित संत कहे जाने पर ही ऐतराज जताया। श्रद्धालुओं के बीच पहुंचते ही सबसे पहले उन्होंने कहा कि वह विवादित नहीं है, ना ही कोई विवाद खड़ा किया है। वह भक्तों को जो संदेश देते हैं, उसे ही दूसरा रूप देकर विवाद करार दे दिया जाता है। संत ने कुंभ नगरी में सोमवार से त्रिवेणी तट पर चार दिवसीय ध्यान योग शिविर की शुरुआत की। इस मौके पर बापू ने कहा कि जब भी समस्याएं परेशान करें, सत्संग का सहारा लें। सत्संग से बड़ी बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं। पूरे दिन इंतजार के बाद भी देर रात भक्तों का उत्साह देख गदगद आसाराम ने कहा कि जनता में उनके प्रति विश्वास है। लोगों ने कई बार झूठे आरोप लगाने की कोशिश की लेकिन अंधकार कभी उन्हें घेर नहीं सका।
संत की एक झलक पाने और उन्हें सुनने के लिए सुबह से बैठे भक्तों से आसाराम ने कहा कि सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही शरीर में ज्यादा ऊर्जा मिलेगी। उत्तरायण को अपने जीवन में भी उतारे। सत्संग करें ताकि अंधेरा दूर भागे। कई उदाहरणों के साथ आसाराम भक्तों को धर्म और आध्यात्म की बातें बताते रहे और दूर तक फैले पंडाल में बैठे हजारों भक्त ध्यान से उनकी बातें सुनते रहे।
भजन कीर्तन कर काटा वक्त
संत आसाराम बापू को दिन में ही सत्संग पंडाल में पहुंचना था लेकिन किसी कारण वह देर रात पहुंचे। श्रद्धालु पूरे दिन टकटकी लगाए आसाराम बापू की राह तकते रहे। सेक्टर छह स्थित शिविर में उन्के भक्त भजन, कीर्तन कर वक्त काटते रहे। देरी के बाद भी भारी भीड़ अनियंत्रित नहीं हुई।
सुरक्षा के भारी इंतजाम
दिल्ली गैंगरेप पर विवादास्पद टिप्पणी के बाद पहली बार प्रयाग आए आसाराम बापू के लिए शिविर में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी तैनात थी। यहां तक कि शिविर के मुख्य गेट पर मेटल डिटेक्टर के साथ भारी फोर्स थी। शिविर के अंदर भी सैकड़ों सेवकों ने मोर्चा संभाल रखा था। किसी भी प्रकार के विरोध से निपटने की पूरी तैयारी थी। शाम होने तक पंडाल महिला व पुरुष श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को भागवत कथा सुनाई जाती रही। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना था कि आसाराम बापू उनके लिए आदरणीय हैं। बुलंदशहर से आईं आरती शर्मा, गुजरात से ज्योत्सना, हैदराबाद से दीप्ति, पटना से पूनम और खुशबू, कोलकाता से ज्योति, भोपाल से माला बाजपेयी व न्यूजर्सी (अमेरिका) र्से आईं अंजली संत आसाराम के दर्शन को आतुर रहीं। शिविर के अंदर ही छोटा सा बाजार भी सजा है, जिसमें भोजन, कैसेट, साहित्य, कपड़े, जूस आदि की कई दुकानें हैं। प्रदर्शनी भी लगाई गई है। दिनभर श्रद्धालु इनका लुत्फ भी उठाते रहे।
ट्रेन पर बैठ लोगों के बीच पहुंचेे
दूर तक फैले सत्संग पांडाल में दूर दूर तक बैठे लाखों श्रद्धालुओं को संत आसाराम के दर्शन सुलभ हों इसके लिए एक पारदर्शी कांच की रेल की डिब्बेनुमा सवारी बनाई गई है। पटरियों पर चली बिना धुएं की इस ट्रेन में बैठकर संत आसाराम पांडाल में श्रद्धालुओं से रूबरू हुए।