इलाहाबाद। सब्सिडी वाले गैस कनेक्शन के फेर में आपने दो तेल कंपनियों का गैस कनेक्शन ले रखा है तो एक सरेंडर कर दें। सब्सिडी सिलेंडरों का बोझ कम करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने नए सिरे से कार्रवाई शुरू कर दी है। इसमें सभी ग्राहकों के डाटा एनआईसी में अपलोड किए जा रहे हैं। एनआईसी ऐसे ग्राहकों के डाटा की छानबीन करेगा। इसमें एक ही नाम या एक ही पते पर किसी ग्राहक ने दो कंपनियों से गैस कनेक्शन ले रखा है तो उसके एक कनेक्शन पर कैंची चल सकती है या दूसरे कनेक्शन सब्सिडी के सिलेंडर मिलने बंद हो सकते हैं। मंत्रालय ने तेल कंपनियों को भी इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
पिछले सालभर से पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक-एक कंपनी के अंदर मल्टीपल गैस कनेक्शनों की धरपकड़ की। शहर में भी करीब 45 हजार कनेक्शन पकड़े गए। इनमें कई ग्राहकों ने एक ही नाम से कई कनेक्शन खरीदे तो कई मामलों में एक ही पते पर कई कनेक्शन चलते हुए मिले। इनकी जांच का काम लगभग खत्म हो चुका है। इसी दौरान सब्सिडी वाले सिलेंडरों के लिए बड़ी संख्या में ग्राहकों ने दूसरी कंपनियों की एजेंसियों से कनेक्शन खरीद लिए। इसके कारण सब्सिडी के सिलेंडरों में उतनी कमी नहीं, जितना तेल कंपनियों और ग्राहकों ने उम्मीद लगाई थी। सो, पेट्रोलियम मंत्रालय ने नए सिरे से ग्राहकों की घेराबंदी का मिशन शुरू कर दिया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अपर सचिव (एलपीजी) राजेश कुकरेती ने आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को पत्र लिखकर कहा है कि तीनों कंपनियों के बीच डी-डुप्लीकेशन का कार्य प्रारंभिक चरण में है। ग्राहकों के आंकड़े एनआईसी को भेजे जा रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने पखवाड़ेभर पहले ही इसकी संभावना जताई थी। यूपी एलपीजी संघ के अध्यक्ष डीपी सिंह भी मानते हैं कि नए ग्राहकों के आंकड़े नेशनल इनफॉरमेट्क्सि सेंटर को भेजने शुरू कर दिए गए हैं। इसमें यह खंगाला जा रहा है कि आवेदक के पास किसी अन्य कंपनी के कनेक्शन नहीं हैं। तेल कंपनियां इंडसॉफ्ट का नया वर्जन लाने जा रही हैं। इसमें एजेंसी पर ही इसकी धरपकड़ हो जाएगी।