इलाहाबाद। महाकुंभ क्षेत्र में लाखों साधु संत जुटे हैं, श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो गया है। तमाम दुकानें भी खुल गई हैं लेकिन उनके बीच कुछ ऐसी दुकानें भी हैं जो लोगों को अपनी तरह खींच रही हैं। दरअसल एमबीए, बीटेक की पढ़ाई कर रहे कई छात्रों ने कुंभ में खुद का रोजगार शुरू कर लिया है। उन्होंने तय किया है कि साधु संतों, श्रद्धालुओं, पर्यटकों को चाय पिलाकर पढ़ाई का खर्च पूरा करेंगे।
बीटेक का एक छात्र अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए कुंभ मेला क्षेत्र में पटरी पर चाय की दुकान चला रहा है तो होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर चुके एक छात्र ने साथ में नमकीन, पकौड़ी, ब्रेड पकौड़ा जैसी खाद्य सामग्री बनाना शुरू कर दिया है। कुंभ में ऐसे दर्जन भर से अधिक युवा खुद का रोजगार शुरू कर रहे हैं।
अलीगढ़ का अमन इलाहाबाद में रहकर एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र शांतम फैशन टेक्नोलॉजी में भी हाथ आजमा रहे हैं। दोनों छात्रों ने कुंभ मेला क्षेत्र में चाय की एक छोटी सी दुकान खोल रखी है। दुकान में चाय के साथ स्नैक्स भी मिलते हैं। शांतम और अमन चाहते हैं कि अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाएं और अभी से अपने माता-पिता का सहारा बन जाएं। दोनों छात्र काफी खुश हैं। सेक्टर-4 में चाय की दुकान चला रहे अमन और शांतम को दुकान आवंटित नहीं हुई है। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं मेला प्रशासन दुकान न हटवा दे लेकिन मेला और पुलिस प्रशासन के ही कुछ अफसरों ने इन युवाओं की हौसला आफजाई की। रविवार को दुकान में कुछ पुलिस अफसर चाय पी रहे थे। बात ही बात में अमन बोल पड़े, ‘मुझे भी एक दिन इनकी तरह आईपीएस अफसर बनना है।’ इसके बाद अमन से अपने हाथों से चाय बनाकर अफसरों को पिलाई।
इंटरनेशनल मीडिया कैं प के पास चाय, पकौड़ी की दुकान लगाने वाले विवेक गुप्ता लखनऊ के तेलीबाग इलाके में रहते हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया और फिर मुंबई के एक रेस्टोरेंट में नौकरी कर ली। विवेक को लगा कि सीमित वेतन में नौकरी करते रहे तो जीवन ऐसे ही बीत जाएगा, सो उन्होंने खुद का रोजगार शुरू करने की ठानी और एक ऐसा व्यवसाय चुना, जिसमें होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई काम आ सके। शुरुआत कुंभ मेला से की है। दुकानों की बोली लाखों में लग रही थी, सो पटरी पर ही व्यवसाय शुरू कर दिया। विवेक के साथ उनका छोटा भाई अनुपम भी व्यवसाय में हाथ बटा रहा था। तीन दिन पहले एक निजी कंपनी से उसका कॉल लेटर आ गया। उसने लखनऊ जाकर नई नौकरी ज्वाइन कर ली। विवेक, अनुपम, अमन, शांतम जैसे दर्जन भर से ज्यादा छात्रों ने कुंभ में खुद का व्यवसाय शुरू किया है। सबका एक ही लक्ष्य है कि पढ़ाई पूरी करने से पहले अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे, पढ़ाई-लिखाई का खर्च खुद उठाएं और घर-परिवार का भी सहारा बनें।