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नाते-रिश्तेदारों को ही मिलेगा मेले में ठौर!

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। अर्धकुंभ की तरह क्या इस बार महाकुंभ में भी जमीन आवंटन के दौरान मेला के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के नाते-रिश्तेदारों को ही प्राथमिकता दी जाएगी? यह सवाल अब विवाद का रूप लेता जा रहा है। मेला में जमीन आवंटन से पहले जिस तरह का खेल शुरू हुआ है, आने वाले दिनों में बड़े विवाद की वजह बन सकता है। जमीन आवंटन की आड़ में घपला करने वालों ने अभी से हेरफेर शुरू कर दी है। 2006-07 के अर्धकुंभ में ऐसे तमाम मामले सामने आने के बाद तत्कालीन मेलाधिकारी ने मेला में सभी अफसरों और कर्मचारियों को शपथपत्र देने के लिए कहा था ताकि पारदर्शिता बनी रही लेकिन छह साल बाद अफसर पुरानी व्यवस्था भूल गए और इस बार किसी से भी शपथपत्र नहीं मांगा गया।
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मेला प्रशासन का दावा है कि अखाड़ों को 25 नवंबर से जमीन आवंटन शुरू कर दिया जाएगा और उसके बाद संस्थाओं का नंबर आएगा। संस्थाओं के लिए 10 दिसंबर से जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की तैयारी है। जमीन आवंटन की तैयारी तो कर ली गई है लेकिन सबसे ज्यादा विवाद में रहने वाली इस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। अर्धकुंभ 2006-07 में मेला क्षेत्र में तैनात एक संस्था लिपिक पर आरोप लगाया गया था कि उसने अवैध रूप से अपने करीबी रिश्तेदार को मेला क्षेत्र में जमीन आवंटित कर दी। तत्कालीन मेलाधिकारी प्रज्ञानराम मिश्र ने मामले की सुनवाई करते हुए संस्था लिपिक पर लगे आरोपों को तो खारिज कर दिया लेकिन यह व्यवस्था कर दी थी कि मेला क्षेत्र में तैनात हर अफसर और कर्मचारी इस आशय का शपथपत्र देंगे कि उनकी या उनके किसी करीबी रिश्तेदार की कोई संस्था मेले में नहीं है ताकि भविष्य में सुधार हो सके लेकिन यह आदेश फाइलों में ही दबा रह गया। इस बार महाकुंभ में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से कोई शपथपत्र नहीं लिया गया। ऐसे में जमीन आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इस बार भी मेले में ऐसे तमाम अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो अर्धकुंभ के दौरान भी मेले में तैनात थे।
सेक्टर 13 पर विवाद बरकरार
मेला क्षेत्र के दो सेक्टर 11 और 12 में जमीन आवंटन को लेकर अभी से विवाद शुरू हो गया है। एक कर्मचारी ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इन दोनों सेक्टरों में सेक्टर कार्यालय के लिए चयनित जमीन किसी दूसरे को देने की योजना बना ली और इसके लिए चोरी छिपे लिखापढ़ी भी शुरू कर दी। ‘अमर उजाला’ में इस बाबत खबर प्रकाशित होने के बाद सेक्टर-11 में तो रातों-रात सब कुछ ठीक कर दिया गया लेकिन सेक्टर-13 का विवाद बरकरार है। मेला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि सेक्टर-13 में सेक्टर कार्यालय के लिए चयनित जमीन किसी और को देने के लिए अब भी जोर आजमाइश चल रही है।
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‘जमीन आवंटन में पूरी पारदर्शिता अपनाई जाएगी। पुराने रिकार्ड से मिलान करने के बाद ही जमीन आवंटित की जाएगी। इसके लिए कुंभ-2001 और अर्धकुंभ-2007 को आधार बनाया जाएगा। इसके बाद नई संस्थाओं को जमीन आवंटन के बारे में विचार किया जाएगा। भविष्य में कोई गड़बड़ी न हो, इसकी भी व्यवस्था की जाएगी। सभी शिविरों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और उसे विजुअल रिकार्ड के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। रही बात शपथपत्र लेने की तो इसमें कोई हर्ज नहीं। आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी तो शपथपत्र भी मांग लिए जाएंगे।’
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: मणि प्रसाद मिश्र, कुंभ मेलाधिकारी
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