फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंधेरगर्दी, मोर्चरी में बदल गई लाश

Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
Allahabad
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद। पोस्टमार्टम हाउस में किस हद तक अंधेरगर्दी है, इसका नजारा शुक्रवार को सबने देखा। लाशों के साथ खिलवाड़ करने वाले स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और डाक्टरों ने हद कर डाली। होलागढ़ की महनाज बानो के शव का पोस्टमार्टम करने के बजाय किसी और युवती के शव का पोस्टमार्टम कर डाला। इतना ही नहीं डाक्टरों ने रिपोर्ट तैयार कर लाश महनाज के घरवालों को सौंप भी दी। घरवाले कपड़े से ढकी लाश गांव ले गए। वहां जनाजा की तैयारी चल रही थी। महिलाओं ने शव देखा तो हंगामा मच गया। शव महनाज का न होकर किसी और का था। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो सभी केहोश उड़ गए। रात में ही शव को गांव से एसआरएन अस्पताल लाया गया। देर रात महनाज बानो के शव का पोस्टमार्टम हुआ। गलती से गई लाश चित्रकूट निवासी मोमिना की थी।
विज्ञापन

होलागढ़ रहीम का पूरा गांव में सहायक अध्यापक इखलाक अहमद ने अपनी बीवी महनाज बानो (21) को मार डाला। उसे छत से धकेलने के बाद दुपट्टे से गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया था। रात में वह पत्नी की लाश अस्पताल में छोड़कर फरार हो गया। महनाज के शव का शुक्रवार को पोस्टमार्टम होना था। परिवार के लोग वहीं जमा थे। लापरवाह डाक्टरों और कर्मचारियों ने महनाज केशव केबजाय चित्रकूट की मोमिना के शव का पोस्टमार्टम कर डाला। अंधेरगर्दी इतनी कि पुलिस की पंचनामा रिपोर्ट तक नहीं देखी। महनाज का गला घोंटा गया था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे जबकि मोमिना की मौत जहर से हुई थी। कैसे पोस्टमार्टम हुआ और डॉक्टरों ने रिपोर्ट तैयार कर दी यह समझ से परे है। महनाज के घरवालों का कहना है कि किसी को पोस्टमार्टम हाउस के अंदर नहीं जाने दिया गया। दूर से ही कपड़ा मंगाया और शव को लपेट दिया। घरवाले रोते बिलखते शव लेकर महनाज के मायकेमऊआइमा में सराय बादशाह कुली गांव पहुंचे। महिलाओं ने शव देखा तो हंगामा खड़ा हो गया। रात में ही शव को गांव से पोस्टमार्टम हाउस लाया गया। हंगामे के बाद देर रात महनाज केशव का पोस्टमार्टम शुरू हुआ।
महनाज के मऊआइमा स्थित घर पर दिन भर चीखें गूंज रही थीं। मगरिब में जनाजा गांव के कब्रिस्तान में ले जाया जाना था। घर पर रिश्तेदारों और गांववालों की भीड़ जमा थी। तैयारी चल रही थी तभी हल्ला मचा कि लाश बदल गई। गमी के दौरान अफरातफरी मच गई। हर कोई लाश देखने को टूट पड़ा। किसी प्रकार अधिकारियों को सूचना देने केबाद शव को वापस भेजा गया।
विज्ञापन

लाश बदलने का मामला बेहद गंभीर है लेकिन इस मसले पर तत्काल कार्रवाई के बजाय सीएमओ डॉ.पदमाकर सिंह डॉक्टरों के हवाले से घरवालों पर दोष मढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक डॉक्टर कह रहे हैं कि घरवालों ने शव की पहचान गलत की। हालांकि उन्होंने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी। सीएमओ ने पूरे मामले को समझने की जरुरत भी नहीं समझी। जब महनाज केघरवालों को पोस्टमार्टम हाउस केअंदर जाने नहीं दिया गया तो उन्होंने लाश की गलत पहचान कैसे कर ली। इसके अलावा जब डॉक्टर पोस्टमार्टम करने बैठे होंगे तो उनके हाथ में पंचनामा की रिपोर्ट होगी। महनाज की मौत गला घोंटने से हुई थी। वह गंभीर रूप से घायल भी थी इसलिए उसके शरीर पर चोटों के निशान भी थे। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने यह नहीं देखा कि वह किस लाश का पोस्टमार्टम कर रहे हैं। जिस लाश को महनाज की जगह भेजा गया उसकी मौत जहर से हुई बताते हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डॉक्टरों ने अंदर कुछ देखा ही नही, ऐसे ही लाश बाहर भेज दी। सीएमओ इस सवाल पर फिलहाल चुप हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें