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शानोशौकत से निकला अलम का जुलूस

Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। बृहस्पतिवार को चांद दिखने के साथ ही मुहर्रम ने दस्तक दी। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और बहत्तर साथियों की शहादत की याद में मातमी जुलूस, नौहाख्वानी का सिलसिला शुरू हुआ। फिजा में या अली, या हुसैन की सदाएं गूंजी।
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रवायतन पहले दिन दोंदीपुर स्थित कल्लन हज्जाम के इमामबाड़े से ऐेतिहासिक अलग का जुलूस उठाया गया जो कदीमी रास्तों मछली बाजार पांचों कब्र, बरनतला, शाहनूर अलीगंज, सब्जी मंडी, चौक, कोतवाली, सेवईं मंडी, नखासकोहना होते हुए पत्थर गली पहुंचकर पूरा हुआ। ढोल ताशा के साथ निकले जुलूस में घोड़े, ऊंट शामिल थे।
लाउडस्पीकर से मातमी नौहे बजते रहे। कई जगहों पर अकीदतमंदों की ओर से गुलपोशी के साथ ही लंगर तकसीम किया गया। संयोजक सिराज अहमद की देखरेख में निकले जुलूस में असरार अहमद नियाजी, मोहम्मद हफीज खान, रियाजुद्दीन, जव्वार नकवी, वजीर खान, गुलाम रसूल आदि शामिल थे।
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सैंतीस मोहल्लों से निकलेंगे जुलुस
इलाहाबाद। इलाहाबाद ऐेतिहासिक मुहर्रम कमेटी में शामिल सभी सैंतीस मोहल्लों से ऐेतिहासिक जुलूस उठाए जाएंगे। इस आशय का निर्णय मुहर्रम कमेटी की बैठक में लिया गया।
चांद की तस्दीक, मुहर्रम की पहली आज
इलाहाबाद। सुन्नी मरकजी रुअते हिलाल कमेटी कदीम के काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी सहित मुफ्ती मुजाहिद हुसैन और मौलाना रईस अख्तर के मुताबिक बृहस्पतिवार को जिलहिज्जा की 29 तारीख को ही मुहर्रम का चांद दिखा। ऐसे में 16 नवंबर को मुहर्रम की पहली तारीख होगी।
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