शराब की दुकान के लिए एनएससी अनिवार्य नहीं: हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शराब की दुकान के लाइसेंस की सिक्योरिटी ई-पेमेंट या एनएससी के जरिए की जा सकती है। सरकार एनएससी जमा करने को अनिवार्य नहीं कर सकती। यह नियमों के विपरीत है। कोर्ट ने याची को ई-पेमेंट करने की छूट देते हुए कहा कि यदि याची पेमेंट कर देता है, अन्य शर्तें भी पूरी करता है तो उसे लाइसेंस देने पर विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा कि एनएससी जमा करना वैकल्पिक है। इसे बाध्यकारी नहीं किया जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति भारती सप्रू एवं न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने राकेश कुमार की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया। राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता निमाईदास एवं स्थाई अधिवक्ता बीपी सिंह कच्छवाह का कहना था कि माफिया ई-पेमेंट का फायदा उठा रहे थे। उन्हें रोकने के लिए सरकार ने नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट से सिक्योरिटी जमा करना अनिवार्य किया है। याची अधिवक्ता मुकेश प्रसाद का कहना था कि नियमों में एनएससी जमा करना बाध्यकारी नहीं है। ई-पेमेंट किया जा सकता है। याची ई-पेमेंट को तैयार है। याची ने देशी शराब के लाइसेंस की अर्जी दी है। उसे एनएससी देने को बाध्य किया जा रहा, जो नियम विरुद्घ है। कोर्ट ने याची को ई-पेमेंट करने की छूट दे दी है।