उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से जारी टीजीटी सामाजिक विज्ञान की उत्तर कुंजी को लेकर परीक्षार्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने चयन बोर्ड के पास ई-मेल करके सात प्रश्नों के उत्तर को उत्तरकुंजी से अलग बताया है। साथ ही साक्ष्य भी मेल किए गए हैं।
चयन बोर्ड की ओर से उत्तर कुंजी जारी होने के बाद अब तक परीक्षार्थियों की ओर से टीजीटी संस्कृत के सात, गृह विज्ञान के छह, शारीरिक शिक्षा के सात एवं हिंदी के चार प्रश्नों को लेकर परीक्षार्थियों की ओर से आपत्ति दाखिल हो चुकी है।
अब सामाजिक विज्ञान जैसे प्रमुख विषय में सात प्रश्नों के उत्तर पर परीक्षार्थियों ने सवालिया निशान लगा दिया है। परीक्षार्थियों का कहना है कि चयन बोर्ड की परीक्षाओं में प्रश्नों के उत्तर लगातार गलत होने से हाल में ही 2009 की टीजीटी सामाजिक विज्ञान के परिणाम में 16 नए परीक्षार्थियों को नौकरी दी गई।
जिन प्रश्नों पर उठाई आपत्ति
-विश्वविद्यालय मे धार्मिक शिक्षा की वकालत मदन मोहन मालवीय ने की थी, परंतु चयन बोर्ड ने सही उत्तर विवेकानंद माना है।
-पुनर्जन्म का सिद्धांत शतपथ ब्राह्मण है, चयन बोर्ड ने छंदोग्य माना है।
-जैन धर्म का श्वेतांबर और दिगंबर मे विभाजन पाटिलपुत्र की सभा में हुआ जो कि विकल्प में ही नहीं है, चयन बोर्ड ने सही उत्तर उत्तर बल्लभी माना है।
-नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय का विकास पाल वंश में हुआ, दोनों विश्वविद्यालय को खिलजी वंश ने नष्ट कर दिया, इसमें दोनों विकल्प गलत हैं, जबकि चयन बोर्ड ने पहला विकल्प सही माना है।
-संसद राज्य सूची पर कानून अनुच्छेद 249 के तहत बना सकती, जबकि चयन बोर्ड ने 259 माना है।
-संसदीय सरकार के तहत राज्य का प्रधान संवैधानिक होता है, जबकि चयन बोर्ड ने निर्वाचित माना है।
-कौटिल्य के राज्य मंडल सिद्धांत के अनुसार विजिगिशु का अर्थ विजेता होता है, जबकि चयन बोर्ड ने इसे विजेता का सहयोगी माना है।