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मुकदमा दर्ज होने पर पासपोऱ् के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी

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मुकदमा दर्ज होने पर पासपोर्ट के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी
0 अदालत से अनुमति मिलने के बाद ही हो सकता है ऑन लाइन आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा लंबित है तो उसे पासपोर्ट जारी करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी है। जिस न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है, उसकी लिखित मंजूरी के साथ आवेदन करने पर ही पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय के 25 अगस्त 1993 के मेमोरेंडम में दी गई शर्तों को अपरिहार्य करार देते हुए याची अलीगढ़ के मोहम्मद ताहिर को संबंधित न्यायालय से अनुमति प्राप्त करने का निर्देश दिया है।
याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर और न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की पीठ ने सुनवाई की। याचिका पर अधिवक्ता साहिद अली सिद्दकी ने बहस की। याची का कहना था कि उसे 2007 में हाथ से लिखा पासपोर्ट जारी किया गया था। कंप्यूटराइज्ड पासपोर्ट के लिए उसने 2014 में आवेदन किया। क्षेत्रीय पास पोर्ट अधिकारी ने उसका आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया कि याची के खिलाफ दो आपराधिक मुकदमे लंबित हैं और उसने संबंधित न्यायालय से एनओसी प्राप्त नहीं किया है।
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याची के अधिवक्ता ने कहा कि पासपोर्ट एक्ट की धारा धारा 6(एफ)(2) के तहत ऐसे मामलों में कुछ शर्तों पूरी करने पर पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। इस शर्त में संबंधित न्यायालय की मंजूरी लेना जरूरी है। मुकदमे का विचारण कर रहे न्यायालय द्वारा यह लिखित रूप में मंजूरी दी जाएगी कि संबंधित व्यक्ति को कितने समय के लिए पासपोर्ट जारी किया जाए। कोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया है कि यदि याची न्यायालय की अनुमति के साथ आवेदन करता है तो उसके आवेदन पर दो सप्ताह में निर्णय लिया जाए।
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