मानक तय नहीं, फंसेगी
टीजीटी-पीजीटी परीक्षा
0 विषयों की अर्हता के लिए शासन की कमेटी की रिपोर्ट के बिना परीक्षा तिथि घोषित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। लंबे इंतजार के बाद विगत 30 नवंबर को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से घोषित टीजीटी-पीजीटी (प्रवक्ता) परीक्षा फंस सकती है। शासन की ओर से टीजीटी-पीजीटी के विषयों की योग्यता तय करने केलिए बनी कमेटी की रिपोर्ट आए बिना ही परीक्षा तिथि तय करने के बाद परीक्षार्थी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं, ऐसे में परीक्षा फंस सकती है।
चयन बोर्ड की ओर से 12 जुलाई को टीजीटी के छह और पीजीटी के दो विषयों का विज्ञापन निरस्त कर दिया गया था। विज्ञापन निरस्त होने के बाद शासन की ओर से अपर निदेशक माध्यमिक की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी, इसके बाद भी कमेटी की रिपोर्ट पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। चयन बोर्ड सचिव ने टीजीटी जीव विज्ञान के 304 पद, टीजीटी संगीत के 22 पद, टीजीटी काष्ठ शिल्प के दो पद, पुस्तक कला के आठ पद, टंकण के एक पद, आशुलिपिक के एक पद एवं पीजीटी (प्रवक्ता) के दो विषयों सहित कुल 341 पदों का विज्ञापन निरस्त किया था। इन पदों के लिए 69328 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। चयन बोर्ड की ओर से विज्ञापन निरस्त करने के बाद भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों से दोबारा आवेदन मांगा गया, परंतु अर्हता पूरी नहीं करने के कारण बहुत कम आवेदन आए।
इस बीच चयन बोर्ड की ओर से शासन की ओर से गठित कमेटी को सार्वजनिक किए बिना ही परीक्षा तिथि घोषित कर दी गई। 2016 की टीजीटी-पीजीटी मेें आवेदन करने वाले 69328 अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से वंचित किया गया तो वह कोर्ट जाएंगे। चयन बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि हाईस्कूल स्तर पर काष्ठ शिल्प, पुस्तक कला, टंकण, आशुलिपि टंकण एवं जीव विज्ञान यूपी बोर्ड के कोर्स में नहीं है। इंटर में वनस्पति विज्ञान नाम का कोई विषय नहीं है, जबकि हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर पर संगीत नाम का कोई विषय नहीं है। ऐसे में इन परीक्षाओं का कोई औचित्य नहीं है।