गंगा किनारे निर्माण करने वाली एजेंसियों को नोटिस जारी
0 हाईकोर्ट ने पांच मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करने पर जवाब तलब किया
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। गंगा-यमुना के उच्चतम बाढ़ बिंदु से पांच सौ मीटर की दूरी (एचएफएल) में निर्माण पर रोक के बावजूद स्थायी निर्माण करने पर हाईकोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने विकास प्राधिकरण, प्रयागराज कुंभ मेला प्राधिकरण, जल निगम की निर्माण इकाई और शहरी विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
भालचंद्र जोशी और दो अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पूछा है कि जब एचएफएल से पांच सौ मीटर तक स्थायी निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक है तो गंगा किनारे स्थायी निर्माण किसकी अनुमति से किया गया। विकास प्राधिकरण की ओर से अपने जवाब में कहा गया कि निर्माण कार्य जल संस्थान की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज ने करवाया है। कोर्ट ने कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज तथा शहरी विकास प्राधिकरण को याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए उनको नोटिस जारी किया है।
याची के अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव का कहना था कि अखिल भारतीय श्री पंच अनी अखाड़ा हनुमान गढ़ी अयोध्या के महंत धर्मदास द्वारा गंगा के किनारे स्थायी निर्माण कराया जा रहा है। यह हाईकोर्ट के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने गंगा प्रदूषण याचिका की सुनवाई करते हुए एचएफएल से पांच सौ मीटर की दूरी तक निर्माण करने पर रोक लगा रखी है। कोर्ट का यह आदेश अभी प्रभावी है, इसके बावजूद स्थायी निर्माण कराया जा रहा है। याचिका पर छह सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।