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39 साल चले मुकदमे में अस्सी की उम्र में हुआ बरी
0 मानव वध के आरोपी को दस हजार जुर्माना लगा बरी किया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने सदोष मानव वध के आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि की सजा को पर्याप्त मानते हुए दस हजार रुपये जुर्माना लगाकर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन आरोप पूरी तरह से सिद्ध नहीं कर पाया है। आरोपी जेल में चार साल बिता चुका है। घटना को 39 साल हो चुके हैं और अभियुक्त की आयु 80 वर्ष हो गई है। उसे इससे अधिक सजा देना औचित्यहीन है। याची रामबालक पांडेय इस घटना का एकमात्र जीवित आरोपी है।
रामबालक की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति हर्ष कुमार ने दिया। अपील पर वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र और उमाशंकर मिश्र ने पक्ष रखा। घटना 27 अगस्त 1979 की है। करछना के रामललक गन्ने के खेत में रामरोज की भैंस घुस गई थी। इसे लेकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई। चोट लगने से बाद में रामरोज की मृत्यु हो गई। सत्र न्यायालय ने चार वर्ष की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई। अपील पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि 39 साल बाद भुगती गई सजा ही पर्याप्त है।