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चयन बोर्ड ने आठ विषयों के विज्ञापन निरस्त किए

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चयन बोर्ड ने 20 वर्षों की गलती सुधारी
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0 यूपी बोर्ड ने 1998 में माध्यमिक शिक्षा नियमावली संशोधन के साथ हटाए गए थे छह विषय
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। टीजीटी-पीजीटी के आठ विषयों का विज्ञापन निरस्त किए जाने के बाद माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने अपनी 20 वर्ष पुरानी गलती सुधारी है। इसके अलावा अफसरों ने माना कि इन विषयों के तहत चयनित शिक्षकों का विद्यालयों में समायोजन चयन बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों, डीआईआएस और स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत से चल रहा था, जिस पर अब रोक लग सकेगी।
दरअसल, यूपी बोर्ड की ओर से 1998 में माध्यमिक शिक्षा नियमावली संशोधन के साथ कई विषयों को खत्म कर दिया गया था। तब यूपी बोर्ड ने काष्ठ शिल्प, पुस्तक कला, टंकण, आशुलिपि टंकण एवं जीव विज्ञान विषय को पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया था। वहीं पीजीटी वनस्पति विज्ञान का कभी कोई पद नहीं रहा। गड़बड़ी सामने आने के बाद चयन बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल मामले को अध्यक्ष वीरेश कुमार के संज्ञान में ले गए। अध्यक्ष की सहमति के बाद आठ विषयों के विज्ञापन निरस्त कर दिए गए। इस प्रकार से देखा जाए तो चयन बोर्ड ने अपनी 20 वर्षों की गलती सुधारी है। चयन बोर्ड की ओर से 1998 की नियमावली लागू होने के बाद 1998, 2001-02, 2004, 2009-10 में टीजीटी-पीजीटी के लिए इन विषयों के लिए विज्ञापन निकाल शिक्षकों का चयन किया गया। ये शिक्षक विद्यालयों में पद सृजित न होते हुए भी पढ़ा रहे हैं। 2011 और 2013 के विज्ञापन में इन विषयों के पद विज्ञापित किए गए हैं। चयन बोर्ड के सचिव दिव्यकांत ने कहा कि अधियाचन में गड़बड़ी किस स्तर से हुई है, इसकी जांच करवाकर जिम्मेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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वहीं चयन बोर्ड सचिव दिव्यकांत एवं उप सचिव नवल किशोर ने स्वीकार किया कि पूर्व में चयन बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षकों के साथ प्रबंधन की मिलीभगत से गलत पदों का विज्ञापन करके चयन के बाद उन्हें बाद में दूसरे पदों पर समायोजित करने का खेल चलता रहा है। अब इस प्रक्रिया पर रोक लगेगी। गलत चयन के कारण ही समायोजन में परेशानी बनी है।

बीएससी-बायो के साथ बीएड वालों को अब मौका नहीं
0 यूपी बोर्ड की ओर से चयन बोर्ड को नौ जुलाई को भेजे गए पत्र के बाद अब बीएससी-बायो के साथ बीएड करने वालों के लिए टीजीटी में आवेदन का मौका नहीं मिलेगा। हालांकि यह अजीब स्थिति है कि यूपी बोर्ड से ही संचालित राजकीय इंटर कॉलेजों में जहां बीएससी-बायो के साथ बीएड करने वालों के पद घोषित होते हैं, वहीं उसी बोर्ड से संचालित सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में इन पदों को खत्म कर दिया गया है।
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यूपी बोर्ड-चयन बोर्ड का सचिव जब एक ही था, तब नहीं हुई कार्रवाई
हाल के वर्षों में एक बार ऐसी स्थिति भी आई जब यूपी बोर्ड और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव पद पर एक ही व्यक्ति रहा। तब भी इस गड़बड़ी से पर्दा नहीं उठा। हालांकि, वर्तमान में इस गड़बड़ी को दूर कर बड़ी कार्रवाई की गई है।
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