सिर्फ परीक्षा नियंत्रक को मालूम, कहां छपे पेपर
0 प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग संस्थान को डिबार करने की तैयारी
0 जांच पूरी होने के बाद कर्मचारियों पर भी कार्रवाई तय
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। आयोग की परीक्षाओं के पेपर कहां छपते हैं, इसकी जानकारी अध्यक्ष और सचिव को भी नहीं होती है। यह सूचना पूरी तरह से गोपनीय होती है और केवल परीक्षा नियंत्रक को इस बारे में जानकारी होती है। सचिव और उपसचिव की दो सदस्यी कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग संस्थान को डिबार किए जाने की तैयारी है। हालांकि, प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ आयोग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। प्रिंटिंग प्रेस के साथ आयोग के उन अफसरों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिनकी ड्यूटी जीआईसी केंद्र में लगाई गई थी।
परीक्षाओं से जुड़े पेपरों की छपाई को लेकर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पूरी तरह से गोपनीयता बरती जाती है। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में केवल परीक्षा नियंत्रक को मालूम होता है कि पेपर कहां छप रहे हैं। जहां तक पेपर में आने वाले सवालों की बात है तो इसकी जानकारी परीक्षा नियंत्रक को भी नहीं होती है। परीक्षाओं के पेपर विशेषज्ञ तैयार करते हैं। पेपर तीन सेट में तैयार कराए जाते हैं और तीनों विशेषज्ञ सील बंद लिफाफे में पेपर रखकर परीक्षा नियंत्रक को सौंप देते हैं। परीक्षा नियंत्रक उन लिफाफों को खोल नहीं सकता, बल्कि तीन में से कोई एक सील बंद लिफाफा प्रिंटिंग प्रेस संचालक को सौंप दिया जाता है। इसके बाद पूरी जिम्मेदारी प्रिंटिंग प्रेस की होती है। अगर पेपर लीक हुआ तो प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ सीधी कार्रवाई का प्रावधान है।
पीसीएस-2015 के बाद बदली पैकेजिंग व्यवस्था
पेपरों की पैकेजिंग भी अब प्रिंटिंग प्रेस में होती है। यह व्यवस्था पीसीएस-2015 के बाद लागू की गई। पीसीएस-2015 तक पेपरों की पैकेजिंग आयोग में ही होती थी। पीसीएस-2015 की प्रारंभिक परीक्षा का पहला प्रश्नपत्र लखनऊ के एक केंद्र से आउट होने के बाद आयोग ने इस व्यवस्था को बदल दिया और पैकेजिंग प्रिंटिंग प्रेस में होने लगी। जांच में अब तक यही बात सामने आई है कि प्रिंटिंग प्रेस में पेपरों की पैकेजिंग के दौरान एक बोरे पर गलत स्लिप लग गई। बोरे में द्वितीय पाली के पेपर थे, लेकिन उस पर प्रथम पाली की पर्ची लगा दी गई। ऐसे में प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। आयोग उसे डिबार करने की तैयारी में है।