वाराणसी के ध्यानार्थ
00000000000
एचआईवी पॉजिटिव होने पर नहीं कर सकते बर्खास्त
0 हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ जवान की बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी को सिर्फ एसआईवी पॉजिटिव होने के आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। जब तक यह साबित न हो कि कर्मचारी स्थायी रूप से अक्षम हो गया है बर्खास्तगी का निर्णय गलत है। कोर्ट ने वाराणसी की सीआरपीएफ की एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए मेडिकल बोर्ड को नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। याचिका पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता अशोक खरे ने दलील दी कि याची की नियुक्ति उसके पति की मृत्यु पर मृतक आश्रित कोटे के तहत की गई। उसे प्रशिक्षण पर भेजा गया। वहां जब मेडिकल जांच हुई तो पता चला कि याची एचआईवी पॉजिटिव(एड्स) है। मेडिकल बोर्ड ने उसे सेवा के उपयुक्त नहीं माना और उसे सेंट्रल सर्विस (अस्थायी सेवाएं) नियमावली के तहत बर्खास्त कर दिया गया। दलील दी गई कि मेडिकल बोर्ड की राय में याची की अक्षमता स्थायी प्रकृति की नहीं है। नियम छह के तहत सिर्फ स्थायी अक्षमता पर ही सेवा से बर्खास्त किया गया जा सकता है। एचआईवी पॉजिटिव होने के आधार पर नौकरी से निकालना अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत तथा विभेदकारी है। सुप्रीमकोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया है। मेडिकल बोर्ड को नए सिरे से निर्णय लेने को कहा है।