उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा का परिणाम बुधवार को जारी कर दिया। इसमें पदों की संख्या के मुकाबले करीब दोगुने यानी 811 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए सफल घोषित किया गया है।
ये अभ्यर्थी 388 पदों पर भर्ती के लिए साक्षात्कार में शामिल होंगे। मुख्य परीक्षा 22 से 26 सितंबर तक प्रयागराज, लखनऊ एवं गाजियाबाद के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की गई थी। परीक्षाफल आयोग के सूचना बोर्ड एवं वेबसाइट पर उपलब्ध है।
हालांकि पीसीएस-2019 के तहत कुल कुल 453 पदों पर भर्ती है, लेकिन बाकी 65 पदों पर भर्ती के लिए साक्षात्कार का प्रावधान नहीं है। इन पदों पर अंतिम चयन मुख्य परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में इंटरव्यू 388 पदों के लिए होगा।
परीक्षा में सम्मिलित सामान्य अर्हता के पदों जैसे, उपकारापाल, कर निर्धारण अधिकारी, विपणन अधिकारी एवं विधि अधिकारी (मंडी परिषद) और विशिष्ट अर्हता के पदों जैसे लेखा एवं संप्रेक्षा अधिकारी, विधि अधिकारी (लोक निर्माण विभाग तथा भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग), ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक एवं पशु चिकित्सा व कल्याण अधिकारी के पदों की संगत सेवा नियमावली में साक्षात्कार का प्रावधान न होने के कारण इनका परिणाम अंतिम चयन परिणाम के साथ घोषित किया जाएगा।
पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा में कुल 4783 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक, कटऑफ आदि की सूचनाएं अंतिम चयन परिणाम घोषित होने के उपरांत दी जाएंगी। प्राप्ताकों एवं कटऑफ अंकों के संबंध में सूचना का अधिकार के तहत प्रार्थनापत्र प्रेषित न किए जाएं।
सचिव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बाहर की महिला अभ्यर्थियों का परिणाम उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में दाखिल विशेष अपील पर पारित अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। मुख्य परीक्षा के आधार पर सफल घोषित अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के बारे में अलग से विज्ञप्ति जारी की जाएगी।
महज तीन माह में जारी हुआ रिजल्ट
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा का परिणाम महज तीन माह में जारी कर दिया। आयोग में ऐसा पहली बार हुआ है और वह भी कोराना काल में। इससे पूर्व मुख्य परीक्षा का परिणाम आने में कम से कम छह माह का वक्त लग जाता था।
इसके पीछे प्रमुख वजह यही मानी जा रही है कि इस बार पदों की संख्या के मुकाबले 18 गुना की जगह 13 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई कराया गया था। ऐसे में पिछली परीक्षाओं के मुकाबले कॉपियों की संख्या भी कम हो गई थी, सो कॉपियों के मूल्यांकन में कम समय लगा।