प्रयाग क्षेत्र में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का ही संगम नहीं होता है, बल्कि देश के कोने-कोने से आए लोगों और उनकी संस्कृतियों का भी संगम होता है। संगम की रेती पर देश-विदेश से आए संत-महात्मा, जन कल्याण के लिए तरह-तरह के संकल्प लेते हैं।
प्रयाग क्षेत्र में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का ही संगम नहीं होता है, बल्कि देश के कोने-कोने से आए लोगों और उनकी संस्कृतियों का भी संगम होता है। संगम की रेती पर देश-विदेश से आए संत-महात्मा, जन कल्याण के लिए तरह-तरह के संकल्प लेते हैं। इन्हीं में से एक हैं नेपाल के विष्णु गिरी महाराज, जो महाकुंभ के लिए 750 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर प्रयागराज पहुंचे हैं। यह यात्रा उन्होंने करीब नाै माह में पूरी की है।
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विष्णु गिरी महाराज, नेपाल के मुक्तिनाथ गोरखा जिले के रहने वाले हैं। वह निरंजनी अखाड़े के संत हैं। उन्हाेंने बताया कि एक साल पहले उन्होंने महाकुंभ के समय प्रयागराज पैदल यात्रा का संकल्प लिया था। फिर एक अप्रैल 2024 से उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी। इस बीच वह चलते-चलते रास्ता भूलकर शिमला पहुंच गए थे। जब उन्हें इसका पता चला तो फिर से यूपी का रुख किया।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दाैरान कई बार वो हादसे का शिकार होने से भी बचे। इसके अलावा भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। यहां तक उन्हें पहुंचने में करीब नौ महीने का समय लगा और इस बीच उन्होंने करीब 750 किमी. की दूरी पैदल तय की। उन्होंने कहा कि संगम स्नान के बाद साथी थकावट दूर हो गई। उसके बाद निरंजनी अखाड़े जाकर साथी संतों से मिले। उनका कहना है कि यदि आप किसी कार्य के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, तो सारी कठिनाई आसान लगने लगती है।