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छोटे पदों पर काम करने वाले
कर्मचारियों से वसूली गलत
0 विभाग की गलती से अधिक भुगतान की वसूली कर्मचारी के रिटायर होने के बाद नहीं हो सकती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि विभाग की गलती से कर्मचारी को हुए अधिक भुगतान की वसूली कर्मचारी के रिटायर होने के बाद करना गलत है। छोटे पदों पर काम करने वाला कर्मचारी जो भी वेतन पाता है, उसे खर्च कर देता है। यदि उसे लंबे समय तक विभाग अधिक वेतन दे रहा है तो वह यह मान लेता है कि वह उतना वेतन पाने का हकदार है। इसलिए कर्मचारी को किए गए अधिक भुगतान की वसूली रिटायर होने के बाद करना उसे कठिनाई में डालना है। वसूली से उसके जीवन में कठिनाइयां बढ़ जाएंगी। ऐसे में कर्मचारी को राहत देना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि मगर जानबूझकर अधिक भुगतान लेने वाले कर्मचारियों को यह राहत नहीं दी जा सकती है।
कोर्ट ने बलिया जल निगम के अवकाश प्राप्त चतुर्थश्रेणी कर्मचारी रघुनाथ भारती से अधिक भुगतान की वसूली के अधिशासी अभियंता जलनिगम बलिया के आदेश को रद्द कर दिया है। रघुनाथ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने कहा कि याची को छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज सहित वसूली गई रकम वापस लौटाई जाए। याचिका पर अधिवक्ता एनके गोस्वामी ने पक्ष रखा। अधिवक्ता का कहना था कि याची चतुर्थश्रेणी के पद से 28 फरवरी 2007 में रिटायर हुआ। उसने अपनी पेंशन और अन्य बकाया भुगतान के लिए दस्तावेज विभाग में दाखिल किए।
अधिशासी अभियंता ने दो अगस्त 2007 को यह आपत्ति लगा दी कि याची का वेतन निर्धारण गलत हुआ था, जिसकी वजह से उसे अधिक भुगतान किया गया है। याची से अधिक भुगतान की वसूली के लिए उसके अवकाश नकदीकरण के 74730 रुपये और भविष्य निधि से 1,86,096 रुपये काट लिए गए। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक कर्मचारी को अधिक भुगतान किया जाता रहा और उसे कोई नोटिस नहीं दिया गया। रिटायर होने के बाद वसूली अनुचित है।