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सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने से
पूर्व अभियोजन स्वीकृति जरूरी: हाईकोर्ट
0 पदीय दायित्व के निर्वहन के दौरान हुई घटना में कर्मचारियों को 197 सीआरपीसी का संरक्षण
0 पावर कारपोरेशन आगरा के अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट और समन आदेश रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि पदीय दायित्व का निर्वहन करने के दौरान हुई किसी घटना के लिए सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने हेतु सरकार से अभियोजन की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। कोर्ट ने बिना स्वीकृति के सरकारी कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने और मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा उस पर संज्ञान लेकर समन जारी करने को अवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने पावर कारपोरेशन आगरा के अधिशासी अभियंता सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ एसीजेएम आगरा की अदालत द्वारा जारी समन आदेश और मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी है।
आयुष कुमार और अन्य की याचिकाओं पर यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने दिया है। याचिका पर पावर कारपोरेशन के अधिवक्ता डीपी धनकरे और बालेश्वर चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं का कहना था कि याचीगण पावर कारपोरेशन आगरा यमुना बैंक पावर हाउस में अधिशासी अभियंता, कार्यालय सहायक आदि पदों पर हैं। तीन जुलाई 1996 को राकेश दोनेरिया की फैक्ट्री पर अधिकारियों ने छापा मारा तथा गलत तरीके से बिजली का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा। फैक्ट्री मालिक पर करोड़ों रुपये की देनदारी निकाली गई। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पावर कारपोरेशन ने बकाया वसूली के लिए राजस्व अधिकारियों की मदद से फैक्ट्री की संपत्तियां नीलाम करवा दीं। इसके विरुद्ध राकेश दोनेरिया ने याचीगण के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र आदि गंभीर धाराओं में एतमुद्दौला थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। विवेचनाधिकारी ने जांच के बाद याचीगण के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया, जिस पर एसीजेएम कक्ष संख्या-12 आगरा ने संज्ञान लेते हुए समन आदेश जारी कर दिया।
अधिवक्ताओं की दलील थी कि याचीगण लोक सेवक हैं और उनको इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 168 के तहत संरक्षण प्राप्त है। साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत लोक सेवक के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति लेना अनिवार्य है। इस मामले में अभियोजन स्वीकृति नहीं ली गई है। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के तमाम न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए कहा कि याचीगण ने अपने पदीय दायित्व के निर्वहन के तहत कार्य किया है, इसलिए उन पर मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति लेना अनिवार्य है। साथ ही याचीगण 168 इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के द्वारा संरक्षित हैं।