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हाईकोर्ट को गुमराह करने में फंसे सामाजिक कार्यकर्ता

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हाईकोर्ट को गुमराह करने में फं से सामाजिक कार्यकर्ता
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0 कारण बताओ नोटिस जारी, मांगा स्पष्टीकरण
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट में गलत हलफनामा देकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश में मेरठ के दो सामाजिक कार्यकर्ता फंस गए हैं। कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना और उनके पैरोकार विपिन कुमार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। दो वकीलों जय बहादुर सिंह और सीवी गुप्ता से भी कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है।
इन वकीलों पर नगर निगम मेरठ ने आरोप लगाया है कि वह उनके पैनल में शामिल नहीं हैं। इसके बावजूद उनके बयान के आधार पर कोर्ट ने याचिका निर्देशों के साथ निस्तारित कर दी। नगर निगम ने 14 सितंबर 2017 के इस आदेश को वापस लेने के लिए याचिका दाखिल की है। यह भी कहा कि कोर्ट को गुमराह कर आदेश हासिल किया गया है। कोर्ट ने 14 सितंबर के आदेश को रद्द करते हुए जनहित याचिका 30 अक्तूबर को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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याचिका मेरठ के विपिन कुमार ने दाखिल की थी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ कर रही है। नगर निगम ने याची और दोनों वकीलों पर धारा 340 सीआरपीसी के तहत (न्यायालय में गलत साक्ष्य देने) आपराधिक कार्यवाही करने के लिए अर्जी दी है। नगर निगम का कहना है कि डंपिंग यार्ड के बगल के याची के बेटे ने दो प्लाट खरीदे हैं। वहां पर मेसर्स मीनाक्षी ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। लोकेश खुराना और याची ने मिलीभगत कर डंपिंग यार्ड को शिफ्ट करवाने के लिए याचिका दाखिल की। दोनों वकीलों ने नगर निगम की ओर से कूड़ा अड्डा शीघ्र स्थानांतरित करने के लिए आश्वासन दिया। इसके बाद कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।
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नगर निगम का कहना था कि मंगलपुरम् ट्रेचिंग साइट पर 9. 65 एकड़ भूमि पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत बॉयो कैपिंग टेकिभनलॉजी अपना कर डीपीआर तैयार किया जा रहा है। इस पर 110 करोड़ रुपये की लागत से संयंत्र लगाया जाना है। अपने स्वार्थ में याची ने इस योजना को रोकने के लिए जनहित याचिका दाखिल की थी और गलत जानकारियां देकर आदेश हासिल किया। याचिका पर 30 अक्तूबर को सुनवाई होगी।
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