10 वर्ष में कर्मचारी नहीं बढ़े, बढ़ते गए परीक्षार्थी
एसएससी
0 नए कर्मचारी भर्ती नहीं होने से पिछड़ रहा काम, संसदीय समिति ने जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षाओं में बीते 10 वर्ष में परीक्षार्थियों की संख्या में लगभग 20 गुना बढ़ोतरी हुई है। इस समय आयोग पर प्रतिवर्ष एक से डेढ़ करोड़ दावेदारों की परीक्षा कराने की जिम्मेदारी है। परीक्षार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के बाद एसएससी में कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ी। अधिकांश काम आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से कराया जा रहा है। संसदीय समिति ने नाराजगी जताई है।
एसएससी में बीते 10 वर्ष में कर्मचारियों की नई भर्ती नहीं हुई है, नई भर्ती नहीं होने से परीक्षाएं नियमित नहीं हो रही और चयन के बाद 10 महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी ज्वाइनिंग नहीं हो रही है। आयोग में नई भर्ती नहीं होने से संसदीय समिति ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है। संसदीय समिति ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि आखिर बीते 10 वर्ष में एसएससी के जिम्मे 20 गुना अधिक परीक्षार्थियों का जिम्मा देने के बाद कर्मचारियों की संख्या एवं संसाधन क्यों नहीं बढ़े। आयोग में नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई बल्कि हर वर्ष इनके रिटायरमेंट के कारण संख्या में कमी आई है।
संसदीय कमेटी की 30 फीसदी पद बढ़ाने की सिफारिश
एक रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारी चयन आयोग के मुख्यालय में लगभग पांच सौ कर्मचारी काम कर रहे हैं और वहां सवा सौ कर्मचारियों की कमी है। इसी प्रकार सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में भी कर्मचारियों की कमी से दिक्कत है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि चार वर्ष पहले कर्मचारियों की संख्या में 30 फीसदी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई थी परंतु सरकार की ओर से इस पर कोई अमल नहीं किया गया। आयोग के कामकाज के निगरानी के लिए गठित संसदीय समिति का मानना है कि पदों को नहीं भरे जाने से आयोग का काम पिछड़ रहा है।
आयोग के पास सीजीएल-एमटीएस जैसी बड़ी परीक्षाओं का जिम्मा
एसएससी मध्य क्षेत्र के निदेशक राहुल सचान का कहना है कि एसएससी के पास इस समय सीजीएल, सीएचएसएल, एमटीएस, जीडी कांस्टेबल जैसी बड़ी परीक्षाओं के साथ स्टेनोग्राफर, जेई, सीपीओ-एसआई, जूनियर हिंदी ट्रांसलेटर के पदों के परीक्षा कराने की जिम्मेदारी है। सीजीएल, सीएचएसएल, एमटीएस और कांस्टेबल परीक्षा में लगभग 40 से 45 लाख परीक्षार्थी होते हैं। परीक्षार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के चलते कर्मचारियों की वर्तमान संख्या कम पड़ रही है। निकट भविष्य में आयोग के पास परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने पर नए कर्मचारी भर्ती करने की आवश्यकता पड़ेगी।