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Heat Wave : झूंसी के छतनाग घाट पर रोजाना 70-80 शवों का हो रहा अंतिम संस्कार, दिनरात धधक रहीं चिताएं

Mon, 03 Jun 2024 04:37 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

भीषण गर्मी और हीट वेव के चलते असमय लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं। झूंसी के छतनाग घाट पर रोजाना 70-80 शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है, जबकि पहले इससे आधे से भी कम लोग यहां पर शवदाह के लिए आते थे। अब स्थिति यह है कि एक साथ कई चिताएं जल रही हैं। 

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घाट पर अंतिम संस्कार के लिए रखे गए शव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आसमान से बरस रही आग के कारण लोगों की मौत का सिलसिला भी तेज हो गया है। इसका अंदाजा झूंसी के छतनाग श्मशान घाट पर रोजाना जल रही सैकड़ों चिताओं से लगाया जा सकता है। हालत यह है कि पिछले एक सप्ताह से छतनाग श्मशान घाट पर चिता की राख ठंडी तक नहीं हो पा रही है। छतनाग श्मशान घाट पर इन दिनों दिनरात चिताएं जलाई जा रही हैं।

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झूंसी स्थित छतनाग घाट पर इन दिनों रोजाना 70 से 80 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। एक साथ इतनी चिताओं को जलाने के लिए लकड़ी तक कम पड़ जा रही है। ऐसे में आसपास के इलाकों से श्मशान घाट पर लकड़ी मंगाई जा रही है। झूंसी में गंगातट के किनारे इन दिनों कोरोना काल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। कोरोना जब अपनी चरम पर था, तब यहां रोजाना 50 से 60 शवों का अंतिम संस्कार होता था लेकिन इस वक्त हालात कोरोना काल से भी भयावह हो गए हैं। पिछले चार दिनों में यहां 200 से 250 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। छतनाग घाट पर लकड़ी बेचने वाले शिवशंकर यादव उर्फ मुलायम ने बताया कि आमतौर पर यहां 8 से 10 शवों का अंतिम संस्कार होता था।

पर सप्ताह भर से पड़ रही भीषण गर्मी के कारण अचानक यहां आने वाले शवों की संख्या में तकरीबन छह गुना बढ़ोत्तरी हुई है। शिवशंकर के मुताबिक पिछले एक सप्ताह से रोजाना 70 से 80 और किसी-किसी दिन तो यहां अंतिम संस्कार के लिए शवों की संख्या 100 के आसपास पहुंच जा रही है। शनिवार और रविवार को कुल 120 शवों का अंतिम संस्कार झूंसी के छतनाग घाट पर किया गया।

मुलायम के मुताबिक इन शवों के अंतिम संस्कार में रोजाना 100 से 125 कुंतल लकड़ी का इस्तेमाल हो रहा है। इस वक्त 80 शवों का अंतिम संस्कार करने में 100 से 125 कुंतल लकड़ी लग रही है। हालत यह है कि शवों को जलाने के लिए लकड़ियां कम पड़ जा रही है। ऐसे में आसपास के क्षेत्रों से लकड़ी मंगाई जा रही है। एक साथ कई शवों के जलने के कारण लोगों के बैठने के लिए बारादरी भी छोटी पड़ जा रही है। मरने वालों में ज्यादातर बुजुर्ग ही बताए जा रहे हैं। इनके मरने का कारण लू लगना ही बताया जा रहा है।

जौनपुर और बादशाहपुर तक से लोग आते हैं अंतिम संस्कार करने

गंगापार के झूंसी छतनाग श्मशान घाट पर जौनपुर, बादशाहपुर तक से लोग शव लेकर अंतिम संस्कार करने को आते हैं। इसके साथ ही झूंसी, हनुमानगंज, सहसों, फूलपुर, बरौत, हंडिया, जगतपुर आदि इलाके से ग्रामीण शव लेकर झूंसी के छतनाग श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने को आते हैं। पिछले कई दिनों से यहां हर दस से पंद्रह मिनट पर लोग शव लेकर अंतिम संस्कार को पहुंच रहे हैं। हालत यह है कि पिछले पांच दिनों से चिता की आग ठंडी नहीं हुई है। सुबह से लेकर देर रात तक शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

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छतनाग श्मशान घाट पर पीने के पानी तक का नहीं है इंतजाम, शौचालय भी नहीं
 

छतनाग श्मशान घाट पर रोजाना 70 से 80 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। अंतिम संस्कार करने के लिए रोजाना लोगों की भारी संख्या यहां पहुंच रही है लेकिन प्रशासन की ओर से घाट के किनारे पीने के पानी तक इंतजाम नहीं है। लोग पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। साथ शौचालय न होने से लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। इसी बीच छतनाग रोड और घाट के किनारे महाकुंभ का कार्य होने से हालात और खराब हैं।

सड़क चौड़ीकरण और नाले का निर्माण होने से लोगों को वहां तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद प्रशासन उदासीन बना हुआ है। नगर निगम के झूंसी जोनल अधिकारी सुदर्शन चंद्रा का कहना है कि पानी की सप्लाई वहां पर जलकल या फिर जल निगम करेगा। जलकल के अधिशासी अभियंता जीएस सोनकर का कहना है कि छतनाग श्मशान घाट के किनारे टैंकर से पानी की सप्लाई जल निगम करेगा। वह क्षेत्र मेरी एरिया में नहीं आता है।

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