फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fraud Case : हार्ट मरीज से 70 हजार ऐंठे, लाइनमैन की फर्जी रसीदें पकड़ में आते ही विभाग में हड़कंप

Sat, 15 Nov 2025 06:29 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मांडा (प्रयागराज)

सार

बिजली विभाग में धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें विद्युत घर मांडा से जुड़े खवास का तारा सिकरा गांव निवासी हार्ट मरीज से एक लाइनमैन ने बीमारी का फायदा उठाकर हजारों रुपये वसूल लिए और फर्जी रसीद थमाकर वर्षों तक गुमराह करता रहा।
विज्ञापन
फर्जी बिजली बिल मांडा में पकड़ा गया। - फोटो : संवाद।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिजली विभाग में धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें विद्युत घर मांडा से जुड़े खवास का तारा सिकरा गांव निवासी हार्ट मरीज से एक लाइनमैन ने बीमारी का फायदा उठाकर हजारों रुपये वसूल लिए और फर्जी रसीद थमाकर वर्षों तक गुमराह करता रहा। पीड़ित की शिकायत के बाद विभागीय जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने से खलबली मच गई है।

विज्ञापन


पीड़ित उपभोक्ता सत्यनारायण गुप्ता पुत्र रामआधार गुप्ता ने एसडीएम मेजा, पुलिस अफसरों और विद्युत विभाग को शिकायती पत्र देकर बताया कि वह 2 किलोवाट का उपभोक्ता है और वर्ष 2014 तक नियमित रूप से बिल जमा करता रहा। इसी दौरान हार्ट की बीमारी बढ़ने पर वह बिल भुगतान नहीं कर सका। जनवरी 2018 में लगभग एक लाख रुपये बकाया होने के कारण विद्युत कर्मियों ने उसका कनेक्शन काट दिया और मीटर व तार उखाड़ ले गए। इसी कार्रवाई के दौरान सम्बंधित लाइनमैन ने बकाया निबटवाने के नाम पर 40 हजार रुपये की मांग की और रसीद जल्द देने का भरोसा दिया।

महीनों तक दौड़ाने के बाद भी रसीद नहीं मिली। वर्ष 2020 में उसी लाइनमैन ने 30 हजार रुपये और मांगते हुए कहा कि तभी पूरा काम सही तरीके से हो पाएगा। पीड़ित ने बीमारी और मजबूरी के चलते यह राशि भी दे दी। इसके बाद वर्ष 2022 में लाइनमैन ने उसे बिजली विभाग जैसी दिखने वाली जमा रसीद और कनेक्शन विच्छेदन की रसीद थमा दी। पीड़ित ने इसे सही मानकर राहत की सांस ली।
विज्ञापन


हालांकि, साल भर पहले जब विद्युत कर्मी फिर बकाया नोटिस लेकर पहुंचे तो पीड़ित के होश उड़ गए। वह रसीद लेकर मांडा उपकेंद्र पहुंचा, जहां जांच में स्पष्ट हो गया कि दोनों रसीदें फर्जी हैं और विभाग द्वारा जारी नहीं की गईं। सत्यनारायण ने बताया कि उसने 7 अप्रैल 2024 को विभाग में लिखित शिकायत दी थी। अप्रैल 2025 में अधिशासी अभियंता ने रसीद संख्या का सत्यापन कराने के बाद लिखित रूप से पुष्टि की कि रसीद विभाग की नहीं है।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि शिकायत लेकर जब वह एसडीओ अशोक कुमार के पास पहुंचा तो उन्होंने उसे डांटकर भगा दिया। वहीं आरोपी लाइनमैन न तो पैसा वापस कर रहा है और न ही किसी कार्रवाई को तैयार है, उलटे धमकियां दे रहा है। पीड़ित ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उपखंड अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें